इस गांव की खास बात यह है कि 300 से अधिक आबादी होने के बाबजूद भी इस गांव में महज 10 लोगों के पास ही सरकारी रोजगार है । यहाँ के बच्चे नौकरी की तलाश में न भटककर स्वरोजगार से ही महीने में 05 से 15 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। जी हाँ साथियों उत्तराखंड में उत्तरकाशी का नैणी गांव खेती बागवानी के बल पर समृद्धि की राह पर कदम बढ़ा रहा है।


ब्लाक मुख्यालय से करीब 05 किमी सड़क की दूरी पर स्थित नैणी गांव के ग्रामीण खेती बागवानी को आजीविका का आधार बनाकर मिशाल पेश कर रहे हैं। भारत में कभी 75% लोग खेती से ही अपनी आजीविका चलाते थे जो आज महज 15 से 20% ही रह गये हैं। ऐसे में उत्तराखंड के नैणी गाँव के लोग पूरे भारत के लिए किसी आदर्श से कम नही हैं।


शिवणी, पथनाला और अखोड़ी प्राकृतिक स्रोत से गांव में सिंचाई की व्यवस्था है। ग्रामीण बगैर सरकारी सहयोग के अपने खेतों में टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन आदि नकदी फसलों के उत्पादन के साथ ही सेब, कीवी आदि की बागवानी भी कर रहे हैं। दो साल पहले गांव में सभी परिवारों ने फूलों की खेती शुरू की, लेकिन बाजार उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने फूल उगाने बंद कर दिए। गांव में खेती बागवानी में किए जा रहे प्रयोग ही हैं कि अन्य क्षेत्रों के किसान भी खेती बागवानी की सीख लेने यहां आते हैं।


आपको यह जानकर अत्यन्त खुशी होगी की नैणी गाँव में महज 32 परिवार रहते है लेकिन एक भी परिवार ने पलायन करने का नही सोचा । बदलते वक्त के साथ कृषि के तरीकों में बदलाव कर गांव की पानी युक्त भूमि से अच्छी फसलें हासिल की । जहाँ जमीन पानी की पहुंच से बाहर थी वहां स्पर प्रजाति के सेब के बागीचों को तैयार किया ।


नैणी गांव निवासी महावीर चंद ने आठवीं कक्षा तक शिक्षा ली है। उन्होंने गांव में टमाटर एवं फूलों की खेती तथा सेब बागवानी के साथ ही सेब के पौधों की नर्सरी भी तैयार की है। खेती बागवानी से वह साल में करीब 15 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। इस प्रगतिशील काश्तकार ने वर्ष 1997 में अपने गांव में कीवी फल का बगीचा तैयार किया था। हालांकि उस समय इस फल को बाजार उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने कीवी उत्पादन बंद कर दिया।


इसी गांव के जगमोहन चंद पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी के पीछे दौड़ने के बजाय उन्होंने गांव में ही नकदी फसल उत्पादन शुरू किया। वह साल भर में खेती बागवानी से 4-5 लाख रुपये की आमदनी कर लेते हैं। वर्तमान में वह रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इसके माध्यम से क्षेत्र में खेती बागवानी को बढ़ावा देने में जुटे हैं।