आज कल उत्तराखंड में जगह जगह अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है । इसकी शुरुआत तो राजधानी देहरादून से हुई लेकिन अब पहाड़ी जिलों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है । लोग अपनी हरकतों से बाज नही आते और सड़कों पर अपनी दुकानें सजा के बैठ जाते हैं जिससे सड़कों की चौड़ाई कम हो जाती है और बाजरों में जाम की समस्या बढ़ जाती है । कई बार जाम इतना लंबा हो जाता है की पुलिस के पसीने छूट जाते हैं। इसलिए नगर निगमों ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया हुआ है । आज ऐसा ही कुछ कोटद्वार में देखने को मिला ।



आज सुबह से ही नगर निगम ने अतिक्रमण पर कारवाई करते हुए नेशनल हाई-वे के फुटपाथ पर जेसीबी चलाना शुरू कर दिया। हालांकि कुछ व्यापारी व दुकानदार निगम द्वारा किये जा रहे तोड़फोड़ का विरोध भी करते नजर आये लेकिन उनकी एक न सुनी गई जिस कारण कुछ ने जेसीबी के सफाया करने से पहले ही अपना सामान समेट लिया । राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे फुटपाथों को घेरकर बैठे दुकानदारों और व्यापारियों के खिलाफ आज से नगर निगम ने प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया है। नवम्बर में उच्च न्यायालय ने नेशनल हाई-वे के साथ ही नगर निगम की सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश जारी किये थे।


माननीय न्यायालय के आदेश के बाद से नगर निगम ने सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी थी। निगम की तरफ से सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने के साथ ही लाउडस्पीकर के माध्यम से उनके द्वारा कब्जाई सरकारी जमीन और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे फुटपाथ को घेरे दुकानदारों और व्यापारियों को स्वत: ही अतिक्रमण हटाने की गुजारिश की गयी थी। लेकिन कुछ लोगों पर इसका असर नही दिखा जिसके बाद नगर निगम ने कारवाई करते हुए आज सुबह बद्रीनाथम मार्ग मालवीय उद्यान में एकत्रित होकर एसडीएम की ओर से निर्देश मिलने के बाद पुलिस टीम के साथ ही कोटद्वार नगर निगम के कर्मचारियों ने अतिक्रमण हटाना शुरू किया और लोगों के भारी विरोध के बाद भी जेसीबी से कई अतिक्रमण युक्त स्थानों को खाली करवाया गया । निगम का साफ कहना है कि यह कार्य आगे भी जारी रहेगा इसलिए जिन लोगों का सरकारी जमीनों पर किसी प्रकार का बिज़नेस या अतिक्रमण किया हुआ है उनको हटाया जाएगा ।