तकनीकी के इस दौर में भले सूचना का आदान प्रदान त्वरित हो गया हो लेकिन चिठ्ठी का जो अहसास था उसका अपना ही आनन्द था । हाँ, डाक सेवा भी इतनी त्वरित नही थी जितनी की आज है किन्तु महीने बाद प्राप्त चिठ्ठी को खोलकर पढ़ने जैसी अनुभूति अब इस मोबाइल के दौर में नही मिलती है । मोबाइल फोन, टेलीविजन व इंटरनेट के युग में चिठ्ठियां सिर्फ विभागीय प्रयोजनों तक ही सीमित रह गई हैं। लेकिन प्रदेश की महिला व बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ग्राम प्रधानों को गुलाबी चिठ्ठी भेज रही हैं।



महिलाओं के गर्भधारण के बाद उन्हें पर्याप्त आराम देने के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की शुरुआत की गई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में गर्भवती महिला के पंजीकरण कराने पर एक हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। गर्भधारण के बाद प्रसव पूर्व जांच के उपरांत दो हजार की धनराशि दी जा रही है। बच्चे के जन्म व सभी प्रमुख टीकाकरण के बाद दो हजार की धनराशि तथा जननी सुरक्षा योजना में एक हजार की राशि दी जा रही है। इस तरह करीब छह हजार की धनराशि महिलाओं को दी जा रही है।



जिसमें महिलाओं को नौकरी से अलग होने के बाद भी सहायता राशि का भुगतान किया जाता है। जिससे महिलाओं को नौकरी, मजदूरी आदि से अलग होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी नहीं आने पाए। ऐसे में इस योजना के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए महिला व बाल विकास मंत्री रेखा आर्या की ओर से प्रिटेड चिट्ठी तैयार की गई है। जिसमें योजना से जुड़ने के लिए विस्तृत विवरण दिया गया है। गुलाबी रंग के इस कागज को लिफाफे में भरकर सभी ग्राम प्रधानों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। जिसमें उत्तराखंड के करीब सात हजार गांवों में महिला व बाल विकास विभाग के जरिए भेजा जा रहा है।