नही रहे हिमालय के प्रसिद्ध फोटोग्राफर स्वामी सुंदरानंद, तपोवन कुटिया के पास बनायी जाएगी समाधि ।

 


संत स्वामी सुन्दरानंद ने 95 वर्ष की आयु में बुधवार की रात को अंतिम साँस ली । आप हिमालय के प्रसिद्ध फोटोग्राफर एवं गंगोत्री के प्रमुख संत थे । गुरुवार को उनका शरीर गंगोत्री लाया जाएगा तथा उनकी तपोवन कुटिया के पास समाधि बनायी जाएगी। स्वामी सुन्दरानंद को बीते अक्टूबर माह में कोरोना संक्रमण भी हुआ था। जिससे स्वस्थ होकर अस्पताल से वह अपने परिचित डॉक्टर अशोक लुथरा के घर चले गए थे। रात को भोजन करने के बाद कुछ देर तक उन्होंने बातचीत की और फिर उनका देहाँत हो गया ।



आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में 1926 में जन्मे स्वामी सुंदरानंद को पहाड़ों के प्रति बचपन से ही आकर्षण था। प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद 1947 में वह पहले उत्तरकाशी और यहां से गोमुख होते हुए आठ किलोमीटर दूर तपोवन पहुंचे। कुछ समय तपोवन बाबा के सानिध्य में रहने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया। 1955 में 19,510 फुट की ऊंचाई पर कालिंदी खाल से गुजरने वाले गोमुख-बदरीनाथ पैदल मार्ग से स्वामी सुंदरानंद अपने साथियों के साथ बदरीनाथ की यात्रा पर थे। अचानक बर्फीला तूफान आ गया और अपने सात साथियों के साथ वे किसी तरह बच गये।



इस घटना के बाद उन्होंने हिमालय के विभिन्न रूपों को कैमरे में उतारने की ठान ली। 25 रुपये में एक कैमरा खरीदा और शुरू कर दी फोटोग्राफी। हिमालय में अपने सफर के दौरान उन्होंने करीब ढाई लाख तस्वीरों का संग्रह किया है। जिसमें अधिकांश फ़ोटो गंगोत्री में स्थित उनकी आर्ट गैलरी में प्रदर्शित हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने अपने अनुभवों को एक पुस्तक ‘हिमालय : थ्रू ए लेंस ऑफ ए साधु' (एक साधु के लैंस से हिमालय दर्शन) में प्रकाशित किया। पुस्तक का विमोचन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।

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