आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को बच्चों की पढ़ाई के लिए सबसे अधिक चिंता रहती है। कई बार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों में बेहद प्रतिभा देखी जाती है लेकिन घर से शिक्षा के आड़े आने वाली आर्थिक कमजोरी में ऐसे बच्चों का हुनर दम तोड़ देता है । कॉलेजों में एडमिशन शुरू होने के साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों और उनके अभिभावकों को हॉस्टल की चिंता सताने लगती है।


प्रदेश में ऐसे बहुत कम कॉलेज ही हैं जिनमे हॉस्टल जैसी व्यस्था है। निजी कॉलेज की फीस इतनी अधिक है कि उसको साधरण व्यक्ति आज व्यय करने की स्थिति में नही है । छात्रों की इस समस्या का समाधान अब नए साल में होगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के निर्देश पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों के प्राचार्य से हॉस्टल के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा पीके पाठक के मुताबिक प्रदेश भर में 20 से अधिक कॉलेजों के प्रस्ताव मिले हैं।


कहां कहां से मिले हैं प्रस्ताव

प्रदेश के त्यूनी, चकराता, जोशीमठ, मुनस्यारी, बलवाकोट, रुद्रप्रयाग, पाबौ, थलीसैंण आदि क्षेत्रों के कॉलेजों में हॉस्टल बनना प्रस्तावित है। इसके लिए कॉलेजों से प्रस्ताव मिलने के बाद इन प्रस्तावों को मंजूरी के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय एवं अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण मंत्रालय केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। संयुक्त निदेशक के मुताबिक अधिकतर हॉस्टल छात्राओं के लिए बनाए जाने प्रस्तावित हैं। प्रत्येक कॉलेज में 50 से 100 छात्राओं के लिए यह हॉस्टल बनेंगे। सभी प्रस्तावित कॉलेजों में हॉस्टल बनने से छात्र- छात्राओं की रहने समस्या काफी हद तक दूर होगी।