दिल्ली जाने में हो सकती है परेशानी, निगम ने वातानुकूलित सेवाओं में की है कमी ।


 

दिल्ली रूट पर ग्रामीण डिपो सबसे ज्यादा बसों का संचालन करता है। इस डिपो की देहरादून आईएसबीटी से रोजाना 20 साधारण और 15 वॉल्वो बसें चलती हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से यात्रियों की संख्या में कमी आ रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की साधारण बसें भी देहरादून से दिल्ली रूट पर चलती हैं। हालांकि कोरोना काल में बाहरी बसों की संख्या भी बहुत कम है लेकिन किसान आंदोलन के चलते लोग दिल्ली का रुख भी नही कर रहे हैं जिस कारण सवारियों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है ।

बामुश्किल से शुरू हुई बस सेवा पर दोबारा कोरोना का साया भी मंडरा रहा है । दिल्ली में बढ़ता कोरोना संक्रमण और सर्दी के कारण रोडवेज बसों में सवारी संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है। रोडवेज ने दिल्ली रूट की पांच वॉल्वो सेवाएं कम कर दी हैं। यात्रियों की संख्या में कमी के कारण निगम की आय भी घटती जा रही है। इससे आर्थिक संकट जूझ रहे रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारी चिंतित हैं।


एक बस में औसतन 15 से 20 यात्री सफर कर रहे हैं। जबकि बसों में सीटिंग क्षमता से 32 से अधिक है। इससे रोडवेज को नुकसान हो रहा है। बसों के डीजल का भी खर्चा नहीं उठ पा रहा है। नुकसान को कम करने के लिए निगम ने बस सेवाओं में कटौती करनी शुरू कर दी है।ग्रामीण डिपो के सहायक महाप्रबंधक केपी सिंह ने बताया कि दिल्ली जाने वाले पांच वॉल्वो सेवाएं कम कर दी हैं। साधारण बस सेवाएं में कोई कटौती नहीं की गई। वॉल्वो सेवाएं यात्रियों की उपलब्धता के आधार पर चलाई जाएंगी। खाली बसें भेजने से निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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