उफनती नदी को पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर शिक्षक व छात्र, उत्तराखंड सरकार को नही कोई परवाह ।

 


यह स्थिति है जिला चम्पावत मुख्यालय से 30 किमी दूर स्थित क्वैराला घाटी क्षेत्र के राजकीय इंटर कालेज पाली की। यहां अध्ययनरत बच्चों को शिक्षा लेने के लिए प्रतिदिन जान जोखिम में डालनी पड़ती है। विद्यालय पहुंचने के लिए क्षेत्र के घुरचुम, न्याड़ी आदि गांवों से बच्चे नदी पार कर विद्यालय पहुंचते हैं। कई बार बच्चे नदी के तेज बहाव में बहते-बहते बचे हैं और चोटिल भी हुए हैं। विद्यालय तक पहुंचे के लिए मार्ग या पुल न होने के कारण बच्चों व शिक्षकों को मजबूरन नदी पर करके ही विद्यालय पहुंचना पड़ता है।



विद्यालयों में अभिभावक व शिक्षक व्यवस्थाओं की मांग करते-करते थक चुके हैं। पर सरकार की कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। सरकारी उदासीनता के चलते राजकीय इंटर कालेज पाली के बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में किसी भी समय नदी का जल स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है।



राइका पाली विद्यालय तक पहुंचने के लिए शिक्षकों व कई छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन तीन से चार किमी पैदल चलना पड़ता है। जिसमें बीच में पडऩे वाली नदी को भी पार करना पड़ता है। राइका पाली का पांच वर्ष पूर्व उच्चीकरण हुआ था। जिसके बाद विद्यालय में प्रवक्ता के पांच पद भरे जाने थे। लेकिन आज तक विद्यालय में एक भी प्रवक्ता की नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं सहायक अध्यापक के भी 12 में से केवल पांच पर सृजित हैं तथा सात पद रिक्त हैं।

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