शर्दियों में धधक रहे जंगल


उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आये दिन जंगलों में आग लगने की खबर आम हो गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले आग गर्मियों में लगा करती थी लेकिन इस साल आग शर्दियों में लगी हुई है, वह भी उच्च हिमालय क्षेत्र के समवर्ती इलाकों में । उत्तराखंड सरकार आये साल करोड़ो वृक्ष लगाकर करोड़ो का बजट इधर से उधर कर देती है लेकिन धरांतल पर हरियाली की जगह सूखे और बेजान वृक्ष ही नजर आते हैं। सवाल यह भी है कि वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका क्या सिर्फ शहरों में बैठकर वेतन लेने भर रह गई है या कभी कभी जंगलात क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्रों में जा रही सड़कों पर घूस खाने की । सवाल यह भी है कि वन विभाग के पास आग जैसी घटनाओं पर काबू पाने के उचित प्रबन्ध व उपकरण क्यों नही है।

वर्ष 2020 में वन विभाग की लापरवाही से गई कई लोगों की जाने

अकेले वर्ष 2020 कई लोगों की जाने गई हैं। हालांकि इसकी वजह आग नही थी लेकिन वन विभाग इसके लिए सीधे सीधे जिम्मेदार था और अगर नही था तो मुआवजा किस बात का । जी हाँ, वर्ष 2020 में अकेले गुलदारों के हमले में आधे दर्जन से ज्यादा लोगों की जाने गई हैं और एक दर्जन से ज्यादा लोग गम्भीर रूप से घायल हुए । कुमाऊँ से लेकर गढ़वाल तक तमाम घटनाओं में वन विभाग लाचार नजर आये । अब यही खेल उल्टा हो गया है इस वक्त इंसान की जगह जंगली जानवर हैं और गुलदार की जगह आग है ।


हाल ही में पोखरी क्षेत्र के जंगल में लगी आग पर बीते मंगलवार कोबड़ी मुश्किल से काबू पाया गया था । यह आग लगभग पांच दिन तक जंगल में लगी रही । बुधवार को आग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंच गई थी। कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने आग बुझा दी। पीपलकोटी के समीप पहाड़ी पर भी दो दिनों से लगी आग चट्टानी भाग तक पहुंचने के बाद बुझ गई। इस घटना में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी अमित कंवर ने बताया था कि वन प्रभाग के अंतर्गत अभी तक पांच हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं।


अब तीन दिन से आग में जल रहा है  अपर यमुना वन  प्रभाग

अपर यमुना वन प्रभाग में बीते तीन दिनों से राड़ी, उपराड़ी एवं कंसेरू गांव के जंगल सुलग रहे हैं, जिससे वन संपदा स्वाह हो रही है। साथ ही आसपास के क्षेत्र में धुंध छाने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी होने के बावजूद आग पर काबू नहीं पाए जाने से वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।


इस संबंध में डीएफओ केपी वर्मा ने बताया कि वन कर्मी आग बुझाने में लगे हैं। कुछ स्थानों पर खड़ी चट्टानों के कारण आग बुझाने में दिक्कत आ रही है। जल्द ही आग पर काबू पा लिया जाएगा। इधर जिला मुख्यालय के निकट तेखला क्षेत्र में भी शुक्रवार रात को जंगल में आग लगी। हालांकि वन कर्मियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझा दी।




लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आग तो उत्तराखंड के जंगलों में आये साल लगती है और वन विभाग पर हर साल करोड़ो का बजट भी पेश होता है । तो आखिर आग पर आबू पाने के लिए अधिक दक्षता वाले उपकरण, हैलीकॉप्टर और स्प्रिंकलर मशीनें क्यों नही खरीदी जाती हैं । यह तो साधरण सी बात है की चढ़ाई पर आग तेजी से लगती है और हाथों से ऐसे स्थानों पर आग को काबू करना आसान काम नही है । लेकिन जानकर भी अगर अगर लाखों जड़ी-बूटी और हजारों वन्य जीवों को आहत किया जाय तो सवाल तो वन विभाग पर उठेंगे ही और जब बात शर्दियों में आग की होगी तो वन विभाग की काबिलियत भी कठघरे में होगी ।