ऊधमसिंह नगर-नैनीताल के सांसद अजय भट्ट ने वर्ष 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए अवगत कराया कि उत्तराखंड में 167093 गाँव हैं। इनमें 1043 गांव खाली हो चुके हैं। लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर गए हैं। मंत्री ये तो मान रहे हैं कि राज्य में रोजगार की समस्या है लेकिन रोजगार देने के नाम पर पिछले वर्षो के झूठे आंकड़े दिखा के युवाओं को गुमराह किया जाता है। अजय भट्ट ने केंद्रीय मंत्री को पत्र लिख माँग की है कि राज्य में बेरोजगारी निरंतर बढ़ रही है। युवाओं व युवतियों के पास रोजगार न होने के कारण उन्हें उचित कौशल विकास का प्रशिक्षण देने की जरुरत है।

माननीय सांसद महोदय शायद यह भूल गये हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पूर्व से ही चला रखी है। इसके अलावा 'उड़ान' जैसे प्रोजेक्ट भी पूर्व से ही चल रहें हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का क्या हाल हुआ ये किसी से छुपा नही है। यह योजना शुरू होने के महज दो साल बाद ही दम तोड़ चुकी थी। बाद में वर्ष 2018 में यह योजना इंजीनियरिंग कॉलेज को दे दी गई थी। वहां भी निजी कॉलेजों इस योजना को पैसों का जरिया बनाकर फर्जी आवेदक दिखाकर पैसे खाए। दरअसल, समस्या यह है कि भाजपा सरकार किसी भी योजना का बखान तो ज्यादा करती है लेकिन हकीकत ठीक उसके विपरीत होती है। यही वजह है कि पहाड़ी क्षेत्रों के लोग पलायन के लिए मजबूर हैं।

सांसद मोहदय कौशल विकास तो छोड़िए, आप केवल पहाड़ी क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति सुधार दीजिए। पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को सही कर दीजिए। सड़कों पर दिन में मात्र दो सरकारी वाहनों की स्थिर सेवा शुरू कर दीजिए।पहाड़ी क्षेत्रों के निकटतम हस्पतालों को सशक्त बना दीजिए। पर ऐसे मत बनाइये जैसा श्रीनगर और श्रोकोट गढ़वाल के हस्पताल हैं जिनमें पूर्ण सुविधाएं ही नही है बाबजूद की श्रीकोट मेडिकल कॉलेज है। पहाड़ समीक्षा दावे के साथ कहता है आप केवल इतना सही कर दीजिए 60% लोग वापस अपने गाँव में लौट आएंगे। लेकिन आप ऐसा नही करेंगे, क्योंकि आपकी राजनीति की चमक इससे कहीं न कहीं धूमिल हो जाएगी और फिर शायद आपके खाने के लिए केंद्र की इतनी राशि भी नही मिलेगी। यह कुछ कुछ वैसा ही खेल है जैसा ठेकेदार सड़को के साथ खेलते हैं। एक बार अच्छा मटेरियल लगा दिया तो सड़क सालों तक टिकी रहेगी और फिर जल्दी से इसके लिए फण्ड नही जारी होगा।

हद तो यह है कि जिस बात के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश से अलग हुए थे आज तक वही मुद्दे हैं। "सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्र का विकास" क्यों यही था न नेताजी मुद्दा ? आज भी वही है। तो पिछले 20 सालों में आपने आप घुइयाँ छिल रहे थे, आप में से तो कई फकीर इतने अमीर हो गये कि अपने गाँव को छोड़कर देहरादून, दिल्ली और विदेशों तक प्रोपर्टी खड़ी कर चुके हैं। लेकिन आपका गांव दयनीय स्थिति में आज भी सहारा ढूंढ रहा है क्यों ? कब तक इस दोगली राजनीति से आम लोगों को बर्गलाओगे, दिन दूर नही जब नेता क्षेत्र भ्रमण करने के लिए इन्हीं पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों से आने की इजाजत मांगेंगे। जनता जाग रही है नेता जी, अब पत्र लिखने का दौर खत्म हो गया । समय रहते जाग जाओ और विकास का सही वर्गीकरण कर सशक्त विकास की उन्मुख हो जाओ।