प्रेम जब हो जाए तो क्या इंसान और क्या जानवर, हर जीव में एक ही जीवन ज्योति है बस समझ उसके मौजूदा शरीर के अनुसार ही विकसित होती है। समझ के मामले में इस धरांतल पर इंसान को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन कभी कभी जानवर भी अपनी कुशल बुद्धि का परिचय देते हैं और इंसानों सा व्यवहार करने लगते हैं। इंसान सभी प्राणियों में श्रेष्ठ होकर भी कभी कभी दुर्व्यवहार कर लेता लेकिन अगर जानवर ऐसी गलती कर ले इंसान उसको तुरन्त दंड दे देता है। लेकिन हर बार ऐसा भी नही होता है कुछ लोग अपने पालतू जानवरों से इतना स्नेह करते हैं कि उनके बिना रहना उनको बहुत बेकार लगता है।

ऐसा ही एक वाक्यात नैनीताल में घटित हुआ जहां एक बंगलूरू के व्यक्ति ने अपनी खोई बिल्ली के लिए ढाई लाख रुपये खर्च कर डाले। दरअसल, बंगलूरू के रहने वाले हर्ष कपूर पिछले साल एक अक्टूबर को अपनी पत्नी भव्या कपूर और दो पालतू बिल्लियों (लियो और कोको) के साथ तीन दिन के लिए नैनीताल घूमने आए थे। इस दौरान वे हल्द्वानी रोड पर भुजियाघाट के पास सूर्यागांव में बने रिजॉर्ट में रुके थे। इस दौरान उनकी दोनों बिल्लियां रिजॉर्ट में घूम रही थी। लेकिन तभी एक बिल्ली (लियो) जंगल की तरफ भाग गई। कपूर दंपती ने बिल्ली को ढूंढने के लिए अपनी छुट्टियां भी बढ़ा ली, लेकिन वो नहीं मिली। उन्होंने बिल्ली के ढूंढने वाले या पता बताने वाले को पांच हजार रुपए का इनाम देने की भी घोषणा की, लेकिन तमाम गांव वालों और रिजॉर्ट के कर्मियों के प्रयासों के बावजूद भी लियो उन्हें नहीं मिल पाई। इसके बाद दंपती मायूस होकर 10 अक्टूबर को बंगलूरू लौट गए।

बहुत सारी खबरों में आप हम कभी न कभी इंसान का जनवरों के प्रति ऐसा प्रेम देखते हैं। कुछ विदेशी लोग अपने पालतू कुत्तों से इतना स्नेह करते हैं कि उसकी मौत के बाद उनकी भी जीने की इच्छा खत्म होने लगती है। देखा जाय तो कुत्ते की औसत आयु 12 से 16 साल ही होती है ऐसे में कुत्ते की मौत पर असहज होना, बौद्धिक कुशलता का परिचय नही है लेकिन कहते हैं ना कि जहां प्रेम होता है, स्नेह होता है, लगाव होता है, वहाँ कोई दूसरी शर्त नही होती है। ऐसे में बिछड़ने पर बेचैनी का होना स्वभाविक हो जाता है और फिर इंसान पैसा देखता और न जीवन। ठीक यही कुछ हुआ बंगलूरू से नैनीताल घूमने आए एक परिवार के साथ, उन्होंने खोई हुई बिल्ली को ढूंढने के लिए करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर दिए। ये बात जिसने भी सुनी हैरान हो गया। जब उनकी बिल्ली उन्हें मिली तो परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा।

10 अक्टूबर जब दम्पति बंगलूरू लौट गए तो बंगलूरू जाकर भी उनका मन अपनी बिल्ली के लिए बेचैन रहा। दंपती लगातार रिजॉर्ट संचालक से फोन के जरिए जुड़े रहे और अन्य लोगों से भी संपर्क किया। तभी 21 जनवरी को किसी ग्रामीण को बिल्ली दिखाई दी। इसकी सूचना उसने कपूर दंपती को दी। कपूर दंपती 25 जनवरी को बंगलूरू से फ्लाइट पकड़कर भुजियाघाट पहुंचे। यहां दो दिन की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें आखिरकार 26 जनवरी की रात उनकी बिल्ली लियो जंगल से लगे एक खंडहरनुमा मकान में मिल गई। लियो को फिर से पाकर कपूर दंपती बहुत खुश नजर आए।

खुशियां छोटी हो या बड़ी खुशियां होती है। यही वजह है कि आर्थिक आधार पर असमानताओं के बाबजूद भी समाज के हर तबके में खुश रहने वाले लोग मिल जाते हैं। आपकी खुशी किस बात पर निर्भर करती है इसका कोई स्तर मानक किसी के लिए नही है। किसी को इंसान से ही ज्यादा प्रेम है तो कोई पुष्प प्रेमी है, कोई प्रकृति प्रेमी है, तो कोई पशु और जनावर प्रेमी है। हर्ष कपूर का कहना है कि वैसे तो लियो और कोको सामान्य बिल्ली हैं, लेकिन दोनों बिल्लियां उन्हीं के घर में पैदा हुईं। इस कारण उनका उनसे गहरा लगाव है।