दिल्ली में किसानों द्वारा दिखाए गये रोष के बाद उत्तराखंड की सीमाओं पर सुरक्षा बढाने के निर्देश जारी कर दिए गये। देश में गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने जो उपद्रव किया उससे पूरी दुनियां में गलत सन्देश गया है। आपको बता दें कि पिछले नौ हप्तों से चल रहे आंदोलन में अब तक 100 से अधिक किसानों की मौत का आंकड़ा प्रकाश में आया है। कृषि बिल को लेकर हुए इस घमासान में न सरकार झुकने को तैयार है और न किसान। किसानों ने गणतंत्र दिवस पर परेड में खुद के शामिल होने की इजाजत मांगी थी जिसको माननीय कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सौंप दिया था। दिल्ली पुलिस से किसानों की वार्ता ले बाद परेड में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया था लेकिन 11 बजे तक सड़क न खोलने से कुछ किसान भड़क गये और उन्होंने बैरियर तोड़ने शुरू कर दिए।

भारत एक विकासशील देश है और इसकी अर्थव्यवस्था में कृषि की बहुत बड़ी भूमिका रही है। भले पिछले 65-70 वर्षो में केंद्र सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नही दिया और कृषि योग्य भूमि के दोहन का कार्य जारी रहा। इसी का नतीजा है की 70% से अधिक कृषि प्रदान देश आज महज 16% से 20% कृषि पर आ गया है। अब स्थिति यह है किकिसान संगठन भी कृषि से ज्यादा राजनीति कर रहे हैं और सरकारें बिना संसद में बहस के ही बिल पास कर रही हैं। देश में जवान, किसान और शिक्षकों की स्थिति पर आज जितना ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है उससे कई ज्यादा राजनीति हो रही है जिस वजह से आम जनता में असंतोष हावी होता जा रहा है।

अब छोटे छोटे आंदोलनों में भी राजनीति रंग तुरंत चढ़ जाते हैं और आंदोलन कब हिंसक हो जाए इसका अंदेशा ही नही रहता है। दिल्ली में जो हुआ उसमें भी कुछ ऐसा ही नजर आया। बाकि आग में घी डालने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हमेशा ही अहम भूमिका में खड़ा नजर आता है। अब इस घटना के बाद तमाम राज्य भी अलर्ट पर आ गये हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर शांतिपूर्ण ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल के बाद उत्तराखंड की सीमाओं पर भी सुरक्षा कड़ी करने का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 26 जनवरी को दिल्ली में किसान रैली के दौरान हुए उपद्रव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने वाले किसान नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों के नाम पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा जो कृत्य किया गया, वह नहीं होना चाहिए था। जो किसान 26 जनवरी के पर्व पर ऐसा कदम उठाये वह किसान नहीं हो सकता। इस प्रकार की घटना हम सबके लिये चिन्ता का विषय है। जो किसान इस अराजकता फैलाने वाले उपद्रव में शामिल नहीं हुए, उन्हें वे नमन करते हैं। हमारे राज्य में इस प्रकार की कोई घटना न हो इसके लिये राज्य सरकार कटिबद्ध है।

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा है कि सभी देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जिले अपने बॉर्डर पर पैनी नजर बनाए रखें। किसानों ने देहरादून भी आने की योजना बनाई थी। हालांकि, मंगलवार को ऐसी कोई बात नहीं हुई। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस महानिदेशक ने एजेंसियों को भी अलर्ट रहने को कहा है।
कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल के बाद दिल्ली में कड़ी सुरक्षा है। हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 22 प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें से ईस्टर्न रेंज में 5 एफआईआर दर्ज की गई हैं, आज भी दिल्ली में कई रास्ते बंद हैं। दिल्ली में किसानों के उग्र प्रदर्शन के अराजक हो जाने के बाद हुई हिंसा में कम से कम 86 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उपद्रवियों को चिन्हित कर सरकार सबक सिखाने का1 प्लान तैयार कर रही है।

दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर जो कुछ हुआ उसकी पहाड़ समीक्षा निंदा करता है। लेकिन केंद्र सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि नौ हफ्तों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन पर समय रहते विचार विमर्श कर काबू नही किया गया। इस देश में रहने वाला नागरिक भारत का नागरिक है और देश की खूबसूरती ही गणतंत्र है तो फिर हर व्यक्ति को अपने विचार रखने का हक है। जय जवान जय किसान वाले देश में किसानों पर गणतंत्र दिवस में शामिल न करने जैसे निर्णयों की जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी चाहिए। जिन किसानों ने सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया उन पर कठोर कारवाई की जवाब देही भी सरकार की ही होगी।