जी हाँ, वही उत्तर प्रदेश जिसने कोरोना काल में एक करोड़ लोगों को मनरेगा के तहत ही रोजगार दिया है । बड़े बड़े न्यूज चैनलों पर करोड़ो रुपये के विज्ञापन से लोगों को बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य जिसने एक साथ एक करोड़ युवाओं को रोजगार दिया । बात यहीं तक रुक जाती तो ठीक था लेकिन इस मौके को भुनाने देश के प्रधानमंत्री भी उत्तर प्रदेश पहुंचे और योगी आदित्यनाथ की विज्ञापनी योजना का शुभारंभ किया । योजना में कितना दम था इसकी पोल तो कई बार खुल चुकी है लेकिन अब उत्तर सेना भर्ती में पकड़े गये 50 मुन्ना भाईयों की हरकतों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का क्या आलम है ।


शुक्रवार यानी कल को देहरादून जिले की चकराता, विकासनगर और त्यूनी तहसील क्षेत्र के युवाओं की भर्ती हुई। सुबह पांच बजे काशीरामपुर तल्ला से युवकों को गबर सिंह कैंप में लाया गया। प्रारंभिक जांच के बाद युवकों को दरबान सिंह स्टेडियम में 1600 मीटर दौड़ाया गया, जिसमें 317 युवकों ने दौड़ पूरी कर ली। दौड़ पूरी करने के बाद सुबह साढ़े 9 बजे सेना के अधिकारियों को जब युवक अपने प्रमाणपत्रों की जांच कराने के लिए पहुंचे तो एक के बाद एक 50 युवकों के प्रमाणपत्र फर्जी मिले। जांच में युवकों के देहरादून जिले के विभिन्न स्थानों से बनाए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र, मूल निवास तक फर्जी मिले।


पकड़े गये इन युवकों ने बताया कि दलालों ने फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के 15 से 30 हजार रुपये तक लिए हैं। सेना के अधिकारियों ने मुन्ना भाइयों के फर्जी कागजात जब्त कर उन्हें कैंप के बाहर खदेड़ दिया। पकड़े गये युवक उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, देवबंद, सहारनपुर, मथुरा और बुलंदशहर जिलों के रहने वाले हैं।