अच्छी खबर ! गंगोत्री-यमनोत्री के बाद ब्रदीनाथ-केदारनाथ रेलवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी, जाने क्या है योजना।


उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलव लाइन के बाद गंगोत्री-यमनोत्री को रेल मार्ग से जोड़ने की पहल तेज हो गई और रेल लाइन के सर्वे का कार्य कब पूरा हुआ किसी को कानों कान खबर नही लगी। जल्द ही गंगोत्री-यमनोत्री रेललाइन पे निर्माण कार्य भी शुरू किया जायेगा। इसी बीच एक और अच्छी खबर आ गई है। अब चारों धामों के महत्व को समझते हुए बद्रीनाथ और केदारनाथ को भी रेल लाइन से जोड़ने का फैसला लिया गया है।

कभी पहाड़ो पर सपने सी लगने वाली रेल अब उत्तराखंड पहाड़ी क्षेत्र के लिए किसी सौगात से कम नजर नही आ रही है। रेल लाइन का अधिकांश भाग भूमिगत होने के कारण अब यात्रा में भी किसी प्रकार के व्यवधान की आशंका नही रहेगी। यात्रा में समय के बचाव से यात्री एक दिन में दर्शन कर वापस भी लौट सकेंगे। आइए अब जान लेते हैं बद्रीनाथ - केदारनाथ रेल लाइन के बारे में कुछ मुख्य बातें।

केदारनाथ के लिए कर्णप्रयाग से सोनप्रयाग तक रेल लाइन बिछाई जाएगी। इसकी लंबाई 91 किमी होगी। इस रेल मार्ग पर छह रेलवे स्टेशन बनेंगे। 19 सुरंगों का निर्माण होगा, जिसमें सबसे लंबी सुरंग 17 किमी की होगी। इस रेलवे ट्रैक के लिए 20 बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा। इस योजना में कर्णप्रयाग से जोशीमठ तक "साईकोट" जंक्शन होगा। पहला स्टेशन घाट रोड पर तिरपात, दूसरा "पीपलकोटी" और तीसरा "हेलंग" और चौथा स्टेशन "जोशीमठ" होगा। जबकि कर्णप्रयाग से सोनप्रयाग तक साईकोट जंक्शन से पहला स्टेशन "बड़ेत", दूसरा "फलासी चोपता", तीसरा "मक्कू मठ", चौथा "गढ़गू", पांचवा "ऊखीमठ" स्टेशन और छठा व आखिरी "सोनप्रयाग" रेलवे स्टेशन बनेगा।

बद्रीनाथ-केदारनाथ योजना लगभग 44 हजार करोड़ लागत से तैयार की जाएगी। रेल विकास निगम की योजना बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम तक रेल पहुंचाने की है। जोशीमठ और सोनप्रयाग के बाद परिवहन के दूसरे व्यावहारिक माध्यमों की संभावनाएं टटोली जा रही है। निगम का परिवहन के विकल्पों को लेकर अध्ययन जारी है।

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