उत्तराखंड समाचार: उमेश चन्द्र पांडे और रमेश प्रसाद बडोनी जैसे प्रतिभाशाली प्रवक्ताओं ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान सम्मान।


उत्तराखंड के सरकारी स्कूल अवश्य ही दीन हीन अवस्था में हैं लेकिन इन्हीं स्कूलों में से कुछ स्कूलों में शिक्षकों के रूप में तैनात ऐसे लोग भी हैं जिनका लोहा विदेशी तक मानते हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल में प्रतिभा की कमी नही है लेकिन प्रतिभा को निखारने वालों की कमी जरूर है। कुमाऊँ में उमेश चन्द्र पांडे और गढ़वाल में रमेश प्रसाद बडोनी जैसे कुछ शिक्षकों के होने से अभी भी उत्तराखंड शिक्षा में अपार संभावनाएं नजर आती हैं।

अल्मोड़ा के रहने वाले उमेश चंद्र पांडे गणित के प्रवक्ता हैं, और इन दिनों जिले के राजकीय हाईस्कूल पौधार में पोस्टेड हैं, जो कि लमगड़ा ब्लॉक में है। वो पिछले 23 साल से छात्रों को गणित पढ़ा रहे हैं, साथ ही खुद भी गहन अध्ययन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल करने वाले गणितज्ञ उमेश चंद्र पांडे ने ‘शून्य’ और ‘अनंत’ पर नया शोध किया है। वो इन पर किताबें भी लिख चुके हैं, ताकि छात्रों का भ्रम दूर कर सकें। गणित के मर्मज्ञ यह गुरुजी खेल-खेल में रोचक अंदाज से गणित पढ़ाते हैं। ‘शून्य’ और ‘अनंत’ को लेकर उनकी अपनी अलग थ्योरी है।

वहीँ दूसरी तरफ फिजिक्स के प्रवक्ता, पुजार गांव निवासी बडोनी गढ़वाल मण्डल में तैनात हैं। रमेश प्रसाद बडोनी उत्तराखंड सर्वाधिक मेधावी शिक्षकों में शामिल हैं। फिजिक्स में उनके 64 ऑनलाइन कोर्स चल रहे हैं। गूगल सर्टिफाइड टीचर बडोनी इससे पहले राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार, नेशनल इनोवेटिव, ग्लोबल इनोवेटिव पुरस्कार भी जीत चुके हैं। इस वक़्त वे एनसीईआरटी, एमओओसीएस और आईआईटी- मुंबई के लिए कक्षा 11 और कक्षा 12 के भौतिक विज्ञान का कंटेंट विकसित कर रहे हैं। बडोनी इस वक़्त एनसीईआरटी के आईसीटी सेल में राष्ट्रीय स्तर के मेंटर भी हैं।

एक नजर :- उमेश चन्द्र पांडे

जहां पूरी दुनिया के गणितज्ञ और रसायन शास्त्री उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। उन्हें "वन ऑफ द मोस्ट इनोवेटिव एजुकेटर्स इन द वर्ल्ड" के अवॉर्ड से नवाजा गया। वो भारत के इकलौते गणितज्ञ हैं, जिन्हें ये सम्मान मिला है। साल 2002 में उन्होंने रसायन विज्ञान की आवर्त सारिणी पर ‘हाऊ मैजिकल इज पिरियोडिक टेबल’ नाम से किताब लिखी थी। साल 2005 में उन्होंने कंप्यूटर की मदद से इसे डिजाइन कर सीडी की शक्ल दी। पूरे प्रोजेक्ट को नाम दिया ‘केमेस्ट्री मेड सिंपलर’। भारत सरकार ने भी उनकी मेहनत को सराहा। साल 2007 में उन्हें कंबोडिया और फिर फिनलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में जाने का मौका मिला। बिल गेट्स ने अमेरिका में "एजुकेशन फॉर फ्यूचर" विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की थी। जिसमें दुनियाभर के 21 गणितज्ञों को न्यौता दिया गया था। इनमें एकमात्र भारतीय उमेश चंद्र पांडे ही मौजूद थे।

एक नजर:- रमेश प्रसाद बडोनी

राष्ट्रीय पुरस्कार के मानक बदलने के बाद वर्ष 2018 में पहला मौका था जब उत्तराखंड के खाते में यह पुरस्कार आया और वह पुरस्कार लाने वाले थे रमेश प्रसाद बडोनी। वर्ष 2019-20 में भारत से अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘फुल ब्राइट डिस्टिंग्विश्ड अवार्ड इन टीचिंग प्रोग्राम फॉर इंटर नेशनल टीचर पुरस्कार के लिए दो शिक्षक चुने गए, जिसमें से एक रमेश प्रसाद बडोनी हैं। आपको बता दें कि फुलब्राइट डीएआई परीक्षा में दुनियाभर से शिक्षक आवेदन करते हैं। इसकी जटिल चयन प्रक्रिया तीन चरणों में होती है, जिसमें स्क्रीनिंग टेस्ट, टॉफेल एग्जाम, इंटरव्यू और उत्कृष्ट अंकों के आधार पर चयन किया जाता है।

राज्य में शिक्षकों की प्रतिभा में कमी नही है लेकिन सरकार को शिक्षकों से कार्य लेना नही आता इस वजह से सरकारी स्कूलों के हालात दिन प्रति दिन बिगड़ रहे हैं। राज्य में हर विषय पर कोई न कोई महारथी शिक्षक मिल ही जाएगा लेकिन सवाल है कि उसके ज्ञान का सही उपयोग कर छात्रों तक कैसे पहुंचाया जाय, उसी ज्ञान से अन्य शिक्षकों को कैसे प्रेरित किया जाय। और यह कार्य सरकार के अलावा कोई और नही कर सकता है। उत्तराखंड के युवाओं में और शिक्षकों में वह क्षमता है कि उत्तराखंड राज्य शिक्षा के क्षेत्र में विश्व को राह दिखा सकता है।

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