उत्तराखंड के गढ़वाल मण्डल में बाबा अमरनाथ के स्वरूप हैं टिंबरसैंण महादेव लेकिन यहाँ अमरनाथ की तरह यात्रा नही होती है। अमरनाथ की तरह टिंबरसैंण महादेव में भी प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग तैयार होता है। कहा जाता है कि बर्फबारी ठीक हो तो शिवलिंग की ऊंचाई तकरीबन पांच फीट तक पहुंच जाती है। बर्फ का शिवलिंग अप्रैल तक रहता है, लेकिन नीती घाटी इनर लाइन के अधीन होने से यहां तीर्थ यात्रियों के जाने पर कई बंदिशें थीं।

अब पिछले कुछ सालों से सरकार बाबा बर्फानी के दर्शन को यात्रा स्वरूप शुरू करने की कवायत कर रही थी। इसी कड़ी में सरकार ने 2018 में भी यात्रा शुरू करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण रोक दी गई थी। प्रदेश सरकार के प्रयासों से केंद्र ने नीती घाटी को इनर लाइन से बाहर कर दिया है। इससे टिंबरसैंण में यात्रा संचालित करने का रास्ता साफ हो गया है। वर्तमान में टिंबरसैंण में तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए अवस्थापना विकास नहीं हुआ है। पर्यटन विभाग ने टिंबरसैंण की यात्रा को संचालित करने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास बजट देने को तैयार है।

अब बाबा अमरनाथ की तर्ज पर देश-दुनिया के तीर्थ यात्री अब उत्तराखंड की नीती घाटी में टिंबरसैंण महादेव की यात्रा कर सकेंगे। मार्च से यात्रा संचालित करने के लिए पर्यटन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार का मानना है कि टिंबरसैंण महादेव की यात्रा से सीमांत नीती घाटी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।