मौजूदा वक्त में अगर कहा जाय कि 'होई वही जो नेता रचराही' तो गलत नही होगा। आम जनता तो बस भीड़ का हिस्सा भर है उसमें एक आप हैं। आपको वही दिशा सुरक्षित लगती है जिस तरफ भीड़ बढ़ रही है और भीड़ जिस देश में बढ़ रही नेता ठीक उसके विपरीत दिशा में चल रहें हैं लेकिन बढ़ती हुई भीड़ का संचालन वही कर रहे हैं। नेता अगर कह दे कि यही सही तो भीड़ कहती है जी हुजूर और सिर्फ भीड़ ही नही आपको उस बात को सही ठहराने के लिए एक पूरा तंत्र काम कर रहा है, जिसमें लेखन मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अनेक शक्तियां काम कर रही हैं।

दरअसल, यह एक ऐसा खेल है जो विश्वास करने पर आधारित है। ठीक वैसे ही जैसे मरीज डॉक्टर पे जाता है और फिर जांच के बाद डॉक्टर कहता है कि आपको कोई गम्भीर बीमारी नही है। बस फिर मरीज सकारात्मक हो जाता है और उसने नई ऊर्जा का संचार होने लगता है, प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे सुधर जाती है और मरीज सही हो जाता है। ठीक यही खेल उत्तराखंड सरकार पिछले दस माह से राज्य की भोली जनता से खेल रही है।सरकार को इस बात से कोई फर्क नही पड़ा कि उसकी इस हरकत से छोटे व्यपारियों के घर किस प्रकार चल रहे हैं लेकिन आंकड़ों के खेल में भीड़ को बहकाने में सरकार ने कामयाबी हासिल कर ली।

सच अब कैसे सामने आ रहा है इसको हमने बारीकी से अध्ययन किया। राज्य में गुरुवार को कहा गया कि उत्तराखंड में 95% कोरोना रिकवरी हो चुकी है और राज्य खतरे से बाहर है। अब इस खेल को बारीकी से समझये। अब तक कोरोना वैक्सीन एक भी आम आदमी को नही लगी , सिर्फ स्वास्थ्य कर्मियों और वारियर को लगी है। अब सरकार कह रही है कि कोरोना 95% रिकवर हो गया है, तो क्या कोरोना सिर्फ स्वास्थ्य कर्मियों को हुआ था ? और अगर यही सच है तो पिछले दस माह से लोगों के करोबार से जो खिलवाड़ किया गया उसकी जवाबदेही किसकी है। आंकड़ों के खेल को इस तरह से खेला गया कि आम जनता इतनी भयभीत हो गई की बस अब मौत आ गई है। लेकिन अब वैक्सीन आते ही नेता जी ने कहा राज्य खतरे से बाहर है तो दिमागी तौर से परेशान लोग स्वस्थ हो गए। नेता जी ने जब जो दिखाने को कहा लोगों को वही दिखाया गया और अब वैक्सीन लगी नही तो 95% रिकवरी हो गया। वाह ! अगर वैक्सीन राज्य में आने से ही ये चमत्कार हो गया तो आम जनता को वैक्सीन के बन्द बोतल में ही दर्शन करवा दीजिए शायद 100% रिकवरी मिल जाए।