उत्तराखंड की कुल जनसंख्या 10,086,292 है। इसमें सबसे पहले कोरोना वैक्सीन का अधिकार स्वास्थ्य कर्मियों और कोरोना वारियर का है जिनकी संख्या का अनुमान कुल 93,000 के आसपास है। आपको बता दें राज्य में 02 जनवरी से ड्राई ट्रायल चल रहा है इस बीच आज यानी बुधवार को राज्य में कोरोना वैक्सीन की पहली खेप पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से सिरम इंस्टीट्यूट से प्रदेश को वैक्सीन की डोज देने के निर्देश जारी किए गए थे। जिसके बाद एक विशेष विमान से देहरादून हवाई अड्डे पर 1.13 लाख कोरोना डोज भेजी गई है।

प्रदेश में कोविशील्ड वैक्सीन का जिलावार वितरण का प्लान तैयार किया गया है। कोविन पोर्टल पर अपलोड डाटा के आधार पर केंद्र ने जिलावार वैक्सीन की डोज तय की है। जिसमें हेल्थ केयर वर्करों की संख्या के आधार पर देहरादून जिले को सबसे अधिक 25.67 प्रतिशत वैक्सीन की डोज मिलेगी। और बाकी बचे 74.33 प्रतिशत में 12 जिलों के कोरोना वारियर को टीके मिलेंगे। एक हेल्थ वर्कर को वैक्सीन की दो डोज लगनी है। इसके हिसाब से 50 हजार हेल्थ वर्करों को वैक्सीन लगाई जाएगी। वैक्सीन की 10 प्रतिशत डोज रिजर्व में रखी जाएगी। केंद्र के दिशानिर्देश के अनुसार पहली डोज लगने के 28 दिनों के भीतर दूसरी डोज लगेगी।

इस कड़ी में सबसे पहले केंद्रीय हेल्थ वर्कर, राज्य हेल्थ वर्कर, आर्म्स फोर्स मेडिकल सर्विस के कर्मचारियों को पहले चरण में टीका लगाया जाएगा। आम जनता तक कब तक यह टीका पहुंचेगा इसका अभी कोई अनुमान नही है। सूत्रों की माने तो आम जनता तक टीका पहुंचने में अभी दो से चार माह तक का समय लग सकता है। एनएचएम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि पहले चरण में सभी जिला चिकित्सालय, मेडिकल कालेज, एम्स, सेना चिकित्सालय, उप चिकित्सालय, प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हेल्थ वर्करों जैसे आशाओं और एएनएम को वैक्सीन दी जाएगी। आपको बता दें कि एक बार टीका लगने के बाद इसकी मियाद एक वर्ष तक बताई जा रही है (इस बात की पुष्टि "पहाड़ समीक्षा" नही करता है) कि टीके की असल मियाद कितनी है, लेकिन यह तो तय है कि आम जनता तक टीके को पहुंचने में कम से कम चार से छह माह का समय लग सकता है।