उत्तराखंड राज्य में प्रकृतिक आपदाओं के रेकॉर्ड को देखते हुए राज्य में तीन में से एक डाप्लर रडार ने अपनी सेवा शुरू कर दी है। केदारनाथ जैसी आपदा को झेलने वाले इस राज्य में तीन डाप्लर रडार लगाए जाने हैं। यह रडार मौसम में बदलाव की तीव्रता को परखने की क्षमता रखता है। आपदा आने से चंद घंटे पहले इसका पता चल जाएगा। वीरान इलाके में भी घटना होती है तो उसकी जानकारी मिल जाएगी। बारिश व तूफान के साथ बादल फटने की तीव्रता का पता लगाने में यह रडार सक्षम होगा। सौ मीटर की हवाई परिधि में मौसमी आपदा को लेकर यह रडार बेहद कारगर होगा।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा. हर्षवर्धन व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रडार का वर्चुअल शुभारंभ किया। मौसम विभाग के राज्य निदेशक डा. विक्रम सिंह ने बताया कि आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील राज्य के लिए अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित डाप्लर रडार की सख्त जरूरत थी। यह रडार 360 डिग्री के दायरे में बादल फटने, भीषण बारिश व आने वाले तूफान का पता लगा लेगा।

मुक्तेश्वर के जिस स्थान में यह रडार स्थापित किया गया है, वहां से 360 डिग्री में मौसम का पूर्वानुमान लगा पाना बेहद आसान होगा। इस रडार को लगाने की कवायद केदारनाथ में आई आपदा के बाद से शुरू हो गई थी। जिसे पहले नैनीताल में लगाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन उपयुक्त जगह नहीं मिल पाने के कारण मुक्तेश्वर में स्थापित किया गया। इस रडार को स्थापित करने में दस करोड़ की लागत आई है। दूसरा रडार सरखंडा में स्थापित करने का कार्य मई से शुरू किया जाएगा। इसके बाद तीसरा रडार लैंसडाउन में स्थापित किया जाएगा।