उत्तराखंड में इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है नशे का कारोबार। पुलिस की सक्रियता के बाबजूद राज्य के मैदानी जिलों से लेकर पहाड़ी जिलों तक क्या चरस और क्या गांजा, खूब परोसा जा रहा है। "पहाड़ समीक्षा" ने अपने लेखों में कई बार इस कारोबार से पाठकों को अवगत करवाया है। इस नशे के खेल में लिप्त बाहरी लोगों पर कैसे नकेल कसे यह भी अपने लेखों में लिखा है,जिससे उत्तराखंड प्रदेश में नशे का करोबार करने वाले भयभीत रह सकें। फिर भी कहीं न कहीं शासन/प्रशासन इस तरफ मुस्तेदी से कार्य नही कर पा रहा है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी की नशे के काले धंधे में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती जा रही है । राजपुर थाना पुलिस ने गांजे के साथ एक महिला को गिरफ्तार किया है। थानाध्यक्ष राकेश शाह ने बताया कि मंगलवार को पुलिस राजपुर क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक महिला को शक के आधार पर रोककर तलाशी ली गई तो उसके पास से दो किलो 180 ग्राम गांजा बरामद हुआ। महिला की पहचान किरण निवासी धोरण रोड के रूप में हुई है।

इस नशे के खेल में जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है वह है युवा पीढ़ी। 14 वर्ष से 25 वर्ष तक के युवा राज्य में नशे की जद में हैं। देहरादून में हुक्का बारों पे खड़े युवाओं की संख्या बताती है कि राज्य युवाओं में नशे का चाह किस प्रकार पनप रही है। नशे में लड़कियां भी पीछे नही है, शराब के ठेकों पर या इन्ही हुक्का पार्टियों में आपको लड़कियां भी अमूमन नजर आ जायेंगी। ऐसे में राज्य में चल रहे इन हुक्का बारों पर सरकार की लगाम का न होना भी चिंता का विषय है। दरअसल, इन्ही हुक्का बारों में धुंए के साथ कई प्रकार के नशे परोसे जाते हैं जो युवाओं को पहले पहले तो अच्छे लगते हैं और धीरे धीरे उसके आदी हो जाते हैं। बस फिर जब नशे का स्तर बढ़ जाता है तो शरीर चरस और गांजे जैसे पदार्थों की मांग करने लगता है और युवा आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं।

आप सभी पाठकों से विशेष अनुरोध है कि अगर आपने हमारी पूरी खबर पढ़ी है और इसके दुष्प्रभाव को आप जान गये होंगे। युवा पीढ़ी को नशे से मुक्त रखने में हमारी मुहिम का साथ दें। नशे के खिलाफ जागरूकता में हमारा सहयोग करें, अपने आस पास युवाओं की हरकतों पर नजर रखें और यदि कोई संदिग्ध नजर आए तो तुरन्त पुलिस को सूचना दें। उत्तराखंड राज्य को नशे से मुक्त रखने में पुलिस का सहयोग करें।