उत्तराखंड में विवादों में पड़ी राजधानी गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन बनाने के बाद कुछ सौगातें तो मिल ही गई हैं। ग्रीष्मकाल में मंत्रीमंडल वहां जाएगा या नही ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन जिस प्रकार से घोषणाएं हो रही है लगता है गैरसैंण अब ज्यादा वक्त गैर नही रहेगा। आपको बता दें ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के विस्तारीकरण के लिए सीएम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राजधानी परिक्षेत्र के लिए 45 किमी परिक्षेत्र में संसाधन खड़े करने और इसके लिए 25 हजार करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की थी।

अब विभिन्न विभागों ने गैरसैंण में अवस्थापना कार्य के लिए कसरत शुरू कर दी है। भराड़ीसैंण में पुलिस बैरक बनकर तैयार है, लेकिन अभी रिपोर्टिंग चौकी, पीएसी बटालियन हेड क्वार्टर, मिनी पुलिस लाइन, फायर, मिनी पीएचक्यू, डीआईजी रेंज ऑफिस, एसपी व एसडीआरएफ कैंप को स्थापित किया जाना है। यहां पुलिस मिनी हेड क्वार्टर, पीएसी बटालियन, मिनी पुलिस लाइन के साथ ही अन्य जरूरी भवनों के निर्माण के लिए पुलिस महकमे को लगभग 200 नाली भूमि की जरूरत है जबकि अभी तक 22 नाली भूमि मिल चुकी है।

भराड़ीसैंण की 100 एकड़ की भूमि पशुपालन विभाग के नाम थी, जो अब राज्य संपत्ति विभाग के नाम हस्तांतरित हुई है। इसमें से 32.5 एकड़ भूमि पर ग्रीष्मकालीन राजधानी के निर्माण कार्य हो चुके हैं, जबकि राजधानी परिक्षेत्र के लिए और भूमि की आवश्यकता होगी। पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस मिनी हेड क्वार्टर राजधानी में स्थापित करने के लिए करीब 200 नाली भूमि की आवश्यकता होगी। इस बाबत राज्य संपत्ति सचिव 9 जनवरी को भराड़ीसैंण में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ निरीक्षण करेंगे।