गौचर हवाई पट्टी का निर्माण वर्ष 1996 में शुरू हुआ था। 509 नाली भूमि पर 15.5 करोड़ की लागत से 1450 मीटर लंबी हवाई पट्टी वर्ष 2000 में बनकर तैयार हुई। वर्तमान में शासन और सेना यहां से हवाई सेवाओं का संचालन कर रही है। वर्ष 2013 में केदारनाथ त्रासदी के दौरान राहत और बचाव कार्यों में काफी उपयोगी साबित होने के बाद इस हवाई पट्टी की ओर केंद्र सरकार और विमानन प्राधिकरण ने अधिक ध्यान दिया और इसको पूर्ण विकसित करने पर योजना के लिए कार्य किया।

आपको बता दें कि प्रमुख स्टेशनों से गौचर हवाई पट्टी की स्थलीय दूरी जौलीग्रांट एयरपोर्ट से 180 किलोमीटर है जबकि पंतनगर विमान क्षेत्र से 285 किलोमीटर, नैनीसैनी पिथौरागढ़ हवाई पट्टी से 295 किलोमीटर और ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से 55 किलोमीटर है। अगर रेलवे स्टेशनों से दूरी की बात करें तो काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 220 किलोमीटर और रामनगर रेलवे स्टेशन से 200 किलोमीटर है। अगर देश की राजधानी इंदिरागांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली से से गौचर हवाई अड्डे की बात करें तो कुल 450 किलोमीटर है।

हवाई पट्टी की लंबाई 1450 मीटर है और विस्तार होने के बाद इसकी लंबाई 1600 मीटर हो जाएगी। विस्तारीकरण की जद में 100 से अधिक भवन और इसके आसपास का भूस्वामितव क्षेत्र आएगा। पटवारी जगदीश औलिया ने कहा कि फिलहाल शासन ने हवाई पट्टी को मुख्य बाजार की ओर 150 मीटर लंबी और 70 मीटर चौड़ी करने के लिए रिपोर्ट मांगी है।