उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला गोल्डन कार्ड फर्जी निकलने से हड़कम्प मच गया है। बताया जा रहा है कि सरकारी चिकित्सालय, डोईवाला कैंप में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों के फर्जी गोल्डन कार्ड बनवाने का मामला प्रकाश में आया है। इस खबर से जहां पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है वहीं गोल्डन कार्ड धारकों के मन में भी संदेह पैदा हो गया है कि, कहीं उनके पास रखा कार्ड भी फर्जी तो नही है।

मिस्सरवाला, डोईवाला निवासी राजेश द्विवेदी ने पिछले साल 9 दिसंबर 2019 को सरकारी चिकित्सालय, डोईवाला में लगे विशेष कैंप में अपना, पत्नी और दो पुत्रों का आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाया था। द्विवेदी ने बताया कि उनके यह चारों कार्ड आधार कार्ड के आधार पर बायोमेट्रिक के जरिए जारी किए गए थे। इसके लिए कैंप में उनसे प्रति कार्ड 70 रुपये कुल 280 रुपये शुल्क भी वसूला गया था। उन्होंने बताया कि उस दौरान करीब चार दिन तक लगातार सरकारी अस्पताल में कैंप चला था। हजारों लोगों ने कैंप में गोल्डन कार्ड बनवाए थे। गुरुवार राजेश द्विवेदी एक निजी अस्पताल में अपना इलाज कराने पहुंचे तो उन्होंने अपना आयुष्मान कार्ड प्रस्तुत किया। अस्पताल प्रशासन की आरे से कार्ड की जांच की गई तो वह फर्जी पाया गया। इसके बाद द्विवेदी ने अपनी पत्नी और बच्चों के कार्ड की भी जांच कराई तो वे भी फर्जी पाए गए।

राजेश द्विवेदी ने इसकी शिकायत पहले सीएससी हेड (आयुष्मान भारत) देहरादून पंकज नेगी से की। पंकज ने मामले की गम्भीरता को समझते हुए द्विवेदी को इसकी शिकायत शासन ने करने को कहा तो द्विवेदी ने ई-मेल के माध्यम से इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय, डायरेक्टर जनरल हेल्थ, सीएमओ देहरादून, जिलाधिकारी देहरादून, चीफ सेक्रेटरी, उत्तराखंड सरकार और एसडीएम, डोईवाला को लिखित रूप में दी। उन्होंने इस मामले में धोखाधड़ी की आशंका जताते हुए उच्च स्तर पर जांच की मांग की है। अगर आपके पास भी गोल्डन कार्ड है तो समय पर उसकी जांच अवश्य करवा लें।