उत्तराखंड में बीते 04 जनवरी को राजनीति का पारा उस वक्त ऊपर चला गया जब दिल्ली के डिप्टी सीएम उत्तराखंड आए और मदन कौशिक को स्कूलों की हालत पर खुली बहस के लिए आमंत्रित किया। आपको बता दें कि मदन कौशिक ने बहस का निमंत्रण स्वतः ही स्वीकार किया था जिससे उन्होंने बाद में पल्ला झाड़ दिया था। उस वक्त उत्तराखंड में मदन कौशिक का काफी उपहास भी हुआ और भाजपा ने पलट वार कर कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति दिल्ली के सरकारी स्कूलों से ही नही बल्कि निजी स्कूलों से भी अच्छी है। लेकिन अब मुख्यमंत्री को सौंपे एक पत्र ने राज्य ले सरकारी स्कूलों की पोल खोल दी है और विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका दे दिया है।

केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति से अवगत कराया। कहा कि 80 इंटर कॉलेज में 62 में प्रधानाचार्य नहीं हैं। अब आप समझ सकते है जिस बाग में माली ही न हो उसकी क्या स्थिति होगी। यह पहली बार नही है जब इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री रावत को इस समस्या से अवगत करवाया गया है। विधायक रावत पूर्व में भी जिले की समस्याओं को लेकर सीएम को पत्र लिखकर अवगत करा चुके हैं। आगे आने वाले माहों में बोर्ड की परीक्षाएं होनी है और 62 स्कूलों में प्रधानाचार्य ही नही हैं तो बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कैसे होगी।

विधायक मनोज रावत ने कहा कि जिले में एक विधायक आपकी पार्टी से हैं, लेकिन उनके विस में भी हाल अच्छे नहीं हैं। कहा कि बिना प्रधानाचार्य के संचालित इंटर कॉलेज में प्रवक्ता को चार्ज मिलता है, जो अपने साथियों के समकक्ष हैं। ऐसे में अनुशासन खत्म हो जाता है। ऐसे में पठन-पाठन के साथ ही शिक्षणेत्तर गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।