भारत में एक कहावत प्रसिद्ध है कि अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और गरीब । इस बात को शायद आप भी दो या तीन पीढ़ियों से सुन रहे होंगे । लेकिन आपकी ही पीढ़ी में कुछ ऐसा हुआ कि आपको लगने लगा या लग रहा होगा की अब गरीब या मध्यम वर्गीय समाज भी अमीर हो जाएगा या हो सकता है । वर्ष 2014 में वर्तमान की भाजपा की सरकार ने जो सपने दिखाए उससे मध्यम और निचले तबके को लगने लगा की अब उनके सपने भी जल्द पूरे होंगे और जो गरीब रेखा में हैं वो मध्यम और जो मध्यम वर्गीय समाज का हिस्सा हैं वो अमीर हो जाएंगे । आज आपके सपनों पर विस्तृत चर्चा इस लेख में करेंगे, जिसमें तथ्य भी होंगे और आपके सपनों के पंखों पर लगी सर्विस और जीएसटी की गोंद का भी अध्ययन होगा ।



भाजपा का भारत विकास मॉडल

वर्ष 2014 में सत्ता में आयी भारतीय जनता पार्टी को पिछले 60-65 वर्षों की सत्ता की भूख और नाकामी शता रही थी । ऐसा नही था कि भाजपा में उस वक्त गद्दावर नेता नही थे लेकिन राजनीति इतनी मैली नही थी जितनी की आज है । खैर राजनीति आज का विषय नही है । 2014 को भाजपा एक सुनहरे मौके के रूप में देख रही थी और उसके लिए जितने झूठ बोलने पड़े पार्टी इसके लिए तैयार थी । पार्टी की तैयारी इस स्तर पर थी कि लोगों को केवल सपना बेचो और पार्टी का फार्मूला कार्य कर गया लोग सपने खरीदने लगे वो भी हँसी खुशी । बस यही सपना भाजपा का "भारत विकास मॉडल" है । अब आप सोच रहे होंगे ये क्या बात हुई, तो अब आपके पहले सपने से दम घुटने तक एक एक सपने के साथ विस्तृत चर्चा शुरू करते हैं ।



१- जन धन बैंक खाते

जन धन बैंक खाता खुलने से लोग समझ रहे थे कि भाजपा सरकार अब इनमें ही 15 लाख रुपये डालेगी या शायद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सहायता पहुँचाएगी । लेकिन इसका दूसरा पहलू आम जनता कभी नही समझ सकती है । उसके लिए आपको पहले बैंक कैसे आपको ब्याज देते हैं इस अवधारणा को जानना होगा । जब भी कोई पैसा बैंक में जाता है तो वह पूर्ण रूप से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ जाता है फिर चाहे हो आपका 100 रुपया हो या 500 रुपया हो । बैंक आपके पैसे को डिजिटल रूप में रिकॉर्ड करता है न कि आपके कैश रूप में । आप जब चाहे अपने पैसे को डिजिटल रूप में देख सकते हैं कि कितना रुपया है । लेकिन आप जब चाहे अपने रुपयों को बैंक में न गिन सकते हैं और अगर राशि बड़ी है तो न बैंक एक साथ से 10 लोगों को उनका पैसा लौटा सकता है। खैर, अब आपको जनधन केवल इसलिए पहुंचाया गया था क्योंकि समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा जो ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकता में था बैंकों से नही जुड़ा हुआ था और उसके पास जो पैसा है वो सरकार की पकड़ से बाहर था, दूसरा जो रोज कमा रहा है और रोज खा रहा है उसका भी सरकार को कोई फायदा नही मिल रहा था, जबकि लोग किसी न किसी रूप में सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ ले रहे थे । तो सरकार ने फ्री में जन धन बैंक खाते खोलने का निर्देश जारी कर दिया । इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि बीच बीच में 500 रुपये डाल दो तो वोटर पक्का बना रहता है, क्योंकि 500 रुपये महीना में अगर किसी का घर चल रहा है तो 30 करोड़ एक चुनावी रैली पे खर्च करने का क्या मतलब है ? चुनाव में दिया जाने वाला पैसा चुनाव आयोग की नजर में आता है लेकिन महीने का 500 जनहित में गिना जाता है । यही तो है भारत विकास मॉडल ।



२- नौटबन्दी या कालाधन

जो सरकार सत्ता में यह कहकर आई थी कि स्विजबैंक से काला धन वापस लाएगी वर्तमान में स्विजबैंक में वह राशि दोगुने से अधिक हो गई है तो आखिर पैसा डाल कौन रहा है । नौटबन्दी से देश का सारा काला पैसा बाहर आ गया तो वह पैसा गया कहां ? इस पर चर्चा क्यों नही हुई । मध्यम और गरीब वर्ग के पास जो पैसा था वो तो पहले ही जन धन खातों या अन्य बैंक खातों में जा चुका था । हाँ, जो धंधे (business) वाले लोग थे उनके पास जरूर पैसा था लेकिन इतनी बडी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए वह धंधे का एक हिस्सा था/है । क्योंकि माल खरीदने से लेकर बेचने तक भारतीय अर्थव्यवस्था में उधारी शब्द का बहुत बड़ा योगदान है। और दुःख तो इस बात का है कि यही उधारी का खेल खेलने वाले 5% बनिया आस पास के 10 लोगों को रोजगार दिए होते थे जो आज चौपट हो गया। सरकार के पास बेरोजगारी के लिए कोई नीति नही है । नौटबन्दी का पैसा कहां गया किसी को पता नही । हद तो ये है कि खुद को पाक साफ कहने वाली पार्टी ने नौटबन्दी में कहा कि पार्टी फंड में दिया जाने वाले पैसे को गोपनीय रखा जाएंगे। बस फिर क्या था बेचे गये सपनों का मूल्य सूत समेत वापस आ गया । यही भारत विकास मॉडल है ।



३- गैस पर सब्सिडी
वर्ष 2014 तक महज 450 रुपये बिकने वाला गैस आज 700 और उससे अधिक में बिक रहा है। जब तक विपक्ष में थे तो 450 रुपये का भी विरोध करते रहे लेकिन सत्ता में आने के बाद ऐसा सपना बेचा कि लोग 700 रुपया महीना देने लगे । करोड़ों लोगों की सब्सिडी खाने के बाद लाखों के खातों में महीना का 500 रुपया डाला तो भारत विकास मॉडल है । मजेदार बात तो यह है कि जिसको गैस 700 रुपये कि बेची उसको उसकी के 500 रुपये लौटा दिए तो परोपकार भी हो गया और वोटर भी पक्का हो गया ।


४- डीजल-पेट्रोल

भारत में एक बहुत बड़ा तबका है जिसके पास किसी प्रकार का वाहन नही है। उसको लगता है कि पेट्रोल और डीजल अगर 1000 रुपये लीटर भी बिकेगा तो उसको क्या फर्क पड़ेगा, क्योंकि उसके पास तो वाहन है ही नही । लेकिन वह ये भूल जाता है कि सरकारी बसों से ही सही कभी तो कहीं जाएगा, दूसरे राज्यों से आने वाली वस्तुओं पर भाड़ा कर बढ़ेगा तो वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी और ऐसा तो नही वह कभी कोई वस्तु बाहर से उपयोग नही करेगा । भारत में आज भी पेट्रोल के दाम 50 रुपये प्रति लीटर ही हैं लेकिन उसपे कुछ % केंद्र और कुछ % राज्य का सर्विस टैक्स जुड़ने के बाद उसकी कीमत 80 से 85 रुपये प्रति लीटर है । कोरोना काल में 2 रुपये प्रति बैरल बिकने वाला तेल भारत में आके 80 से 90% सरकार को कमा के दे गया कोरोना काल में, जो आपकी जेब से गया तो यही तो भारत विकास मॉडल है ।



- वाहनों की बढ़ी कीमत

अच्छा आप खुद बताइए वर्ष 2014 से पहले एक्टिव या अन्य स्कूटी और बाइक कितने की आती थी । आज उनमें ऐसा क्या लग गया कि कीमत 80 हजार से 01 लाख हो गई । मजेदार बात सुनिए पहले गाड़ी की बॉडी में लोहा उपयोग होता था और अब अधिकांश प्लास्टिक है फिर भी कीमत दो गुनी हो गई । यही तो भारत विकास मॉडल है ।

६- खाद्य और पेय पदार्थ 

पहले जब किसी दिन कमाने वाले व्यक्ति को समान लेते देखते थे तो वह लाला को 50 रुपये देता था और उसमें 10 सामान बता देता था। आज यही स्थिति मध्यम वर्गीय लोगों की हो गई है। अपनी इच्छाओं में कटौती कर जीवन को सीमित कर दिया है। अचानक अगर टमाटर या प्याज बढ़ जाता है तो दो-दो महीना प्याज टमाटर बन्द हो जाता है। जो सब्जी और फल खुले में उगते है वही बन्द डब्बो में आके चार गुने दाम के हो जाते हैं फिर भी अम्बानी और अडानी के मॉल अच्छे हैं तो यही तो भारत विकास मॉडल है क्योंकि स्टोर करके जब मर्जी महंगे दामों पर बेचो ।

वर्ष 2014 के बाद से रोजगार गया कोई बात नही, निजी क्षेत्रों में रोजगार नही मिला तो कोई बात नही, छोटी दुकानों को नौटबन्दी और जीएसटी से खत्म किया कोई बात नही, हर सड़क पर टोलटैक्स लगाया कोई बात नही, डीजल-पेट्रोल महंगा हुआ कोई बात नही, गैस 700 रुपये की हो गई कोई बात नही, वाहन महंगा हो गया कोई बात नही, खाद्य पदार्थ महंगा हो गया कोई बात नही, शिक्षा का स्तर बत्तर हो गया कोई बात नही, स्वाथ्य सेवाओं में लूट बढ़ गई कोई बात नही। हाँ आपके खाते में महीने के 500 आ गये तो यही तो भारत विकास मॉडल है। जिस देश का नागरिक ही सशक्त नही है उस राज्य का विकास कैसे होगा और जिस देश के राज्य ही सशक्त नही है उस देश का विकास कैसे होगा ? ये आप जैसे ज्ञानी व्यक्तियों के विवेक पर छोड़ देते हैं।