उत्तराखंड में हिमालयी क्षेत्रों में चैनाग 47 प्लस 360 से 63 प्लस 117 किलोमीटर तक यह टनल बनाई जाएगी। इसका निर्माण टनल बोरिंग मैथड (टीबीएम) और न्यू ऑस्ट्रियन टनल मैथड से किया जाएगा। यह हिमालयी भूभाग में तैनात होने वाली सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन होगी। जानकारों की माने तो हिमालय क्षेत्र में अभी तक इतनी लम्बी सुरँगों का निर्माण नही किया गया है । टीबीएम के माध्यम से खुदाई की गई टनल की लंबाई 20.807 किलोमीटर होगी, जो हिमालय क्षेत्र में किसी भी परियोजना में अब तक की सर्वाधिक लंबाई है।

आपको बता दें की यह सुरँग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है। इसके लिए एलएंडटी कंपनी के साथ रेल विकास निगम ने 3338 करोड़ का अनुबंध किया है। यह रेलवे लाइन बहुत ऊबड़-खाबड़ हिमालयी इलाकों को पार करेगी, जिनका अलाइनमेंट जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के साथ हिमालय के थ्रस्ट जोन के समानांतर है।

125.20 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग परियोजना का 84.24 फीसदी भाग (105.47 किलोमीटर) भूमिगत है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग परियोजना के तहत बनने वाले 13 रेलवे स्टेशनों में से 10 स्टेशन पुलों के ऊपर और सुरंग के अंदर होंगे। इन स्टेशनों का प्लेटफार्म वाला हिस्सा ही खुली जमीन पर दिखाई देगा।