राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में जलापूर्ति के लक्ष्य को लेकर 115 करोड़ की लागत से झील का निर्माण होगा। इसके तहत 65.35 करोड़ से झील निर्माण और 38.74 करोड़ रुपये अन्य कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। इस योजना से प्रतिदिन 70 लाख लीटर पेयजल की आपूर्ति की जा सकेगी और भविष्य में इस झील को पर्यटन व रोजगारपरक योजनाओं से भी जोड़ दिया जाएगा।

रामगंगा पर बनने वाली इस झील की गहराई 31 मीटर और लंबाई करीब एक किलोमीटर होगी। इससे गैरसैंण, भराड़ीसैंण, सारकोट, परवाड़ी, मैलाणा, छजगाड़, मरोड़ा, सारेग्वाड़, सलियाणा, गैड़, धारगैड़, ग्वाड़, कोलियाणा, सोनियाणा, खत्रियाणा, गडोली, सैंजी, सिमाण के गांवों के करीब 30 हजार की आबादी को फायदा मिलेेगा। इस योजना में बिछने वाली पाइप लाइनों की कुल लंबाई 77 किलोमीटर होगी। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2020 को भराड़ीसैंण में की थी।

गैरसैंण में रामगंगा पर बनने वाली झील 31 मीटर गहरी होगी। बृहस्पतिवार को इस स्थल का उत्तराखंड अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र और उत्तराखंड साइंस शिक्षा शोध केंद्र के निदेशक डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने निरीक्षण कर उसे अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए झील स्थल का चयन कर दिया गया है। अब यहां झील बनाने में कोई शंका नहीं है। बिष्ट ने कहा कि इस योजना का काम जल्द पूरा हो जाएगा। इसके लिए वित्तीय और वन हस्तांतरण की कार्यवाही गतिमान है।