मयंक रावत का चयन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र कलपक्कम, चेन्नई में हुआ है। मयंक मूल रूप से कंडारा गांव के रहने वाले हैं । कंडारा गांव ऊखीमठ तहसील के अंतर्गत आने वाली क्यूंजा घाटी में पड़ता है। मयंक के पिता विजयपाल सिंह रावत पौड़ी जिले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। माता कमला रावत गृहणी हैं। मयंक ने अपनी पढ़ाई पहाड़ में ही की है। उन्होंने साल 2012 में केवी अगस्त्यमुनि से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। बाद में उनका नवोदय विद्यालय में चयन हो गया। साल 2014 में उन्होंने नवोदय विद्यालय जाखधार से इंटरमीडिएट की परीक्षा उतीर्ण की है ।

साल 2015 में मयंक रावत ने एनआईटी श्रीनगर गढ़वाल में बीटेक में प्रवेश लिया। यहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। बाद में उनका चयन आईआईटी मद्रास में हो गया। वर्तमान में वह आईआईटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। इसी बीच मयंक का चयन IGCAR में होने से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।

मयंक रावत ने यह भी साबित कर दिया है कि अगर लगन हो तो क्या पहाड़ और क्या शहर। पिता प्रशासनिक सेवा में हैं इसलिए उनको एक अच्छा मार्गदर्शन भी अवश्य प्राप्त हुआ होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों के विकास में आड़े आने वाली सबसे बड़ी समस्या है माता पिता का उच्च मार्गदर्शक न होना और सरकारी स्कूलों के अध्यापक बच्चों पर इतना ध्यान देते नही क्योंकि उनके बच्चे उन सरकारी स्कूलों में पढ़ते ही नही जहां वह स्वयं पढ़ाते हैं। देखा जाय तो पहाड़ में टेलेंट की कमी नही है लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में उच्च मार्गदर्शन का बहुत बड़ा अभवा है जिस कारण आधे बच्चे अपनी प्रतिभा को व्यक्त ही नही कर पाते हैं।