उत्तराखंड में नशे के बढ़ते व्यापार और प्रभाव को देखते हुए "पहाड़ समीक्षा" लगातार लेख प्रकाशित कर रहा है। अपराध चाहे नशे के करोबार का हो या यौन उत्पीड़न या किसी से ठगी का। अपराध, अपराध होता है और दोषी चाहे घर का हो या बाहर का सजा सख्त ही होनी चाहिए। राज्य में अब तक प्रकाशित हुए विभिन्न समाचारों में यौन उत्पीड़न या लड़की भगाने के मामले, लूट व चोरी के मामले, नशे के कारोबार में पकड़े गये लोग आदि सब मामलों में 99% लोग दूसरे राज्यों के होते हैं। जो उत्तराखंड में आते तो काम के नाम पर है लेकिन यहाँ आकर आपराधिक प्रवृति के काम करते हैं। अब अगर आपको अपनी सुरक्षा चाहिए तो इसमें केवल सरकार ही उत्तरदायी नही है। इसके लिए आपको भी आगे आना होगा। क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में जहां लड़कियों और स्त्रियों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है वही दूसरी तरफ यही बाहरी लोग पहाड़ी जिलों की युवा पीढ़ी को नशे का आदी बनाने में लगी हुई है।

हाल ही में चेकिंग के दौरान मुनिकीरेती में रिहान (21) निवासी महमूदपुर थाना पिरान कलियर हरिद्वार को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर नरेंद्रनगर में पालीटेक्निक कॉलेज से लेकर प्राइवेट कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं तक स्मैक की सप्लाई करते हैं। सोचिए स्थिति कितनी खराब है कि पॉलीटेक्निक कॉलेजों के बच्चे जिनका दाखिल 10वीं और 12वीं के बाद होता है, क्या उम्र होगी उन बच्चों की ? माता पिता की खबर भी नही होगी कि उनका बच्चा पढ़ रहा है या नशे कर रहा है। जब  पॉलीटेक्निक से बाहर निकलेगा तो पिता सोचेगा अब बेटा/बेटी कुछ बनेगा/गी लेकिन तब तक उसको नशे के लिए ही हर माह एक मोटी रकम चाहिए होगी और अगर नही ले सकता तो मानसिक तौर पर स्थिति इतनी खराब हो जाएगी कि जीवन भर माता पिता के लिए रोना हो जाएगा।  

रिहान की निशानदेही पर जब पुलिस ने टिहरी में छापे मारे तो जुबेर अहमद (22) निवासी सी-106 कुलणा मार्केट नई टिहरी और शंकर पंवार (22) निवासी बौराड़ी को 11 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि शंकर पंवार पहले भी चोरी के आरोप में जेल जा चुका है। हो सकता है आपको अभी यह सब बाते साधरण लग रही होंगी लेकिन आजम राज्य को न देखना पड़े इस लिए "पहाड़ समीक्षा" लागातर लिख रहा है। पुलिस दिन रात ऐसे लोगों की तलाश कर रही है, आप अगर किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं या संदेह है तो तुरन्त अपने निकटवर्ती पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाये। डरें नही पुलिस आम जनता की सुरक्षा के लिए है, आपकी पहचान पूर्ण रूप से गोपनीय रखी जायेगी।  

अपनी जिम्मेदारी को समझना जरूरी हो गया है। सरकार के हाथ में सभी कार्य सौंप देना समस्या का समाधान नही है। पैसों की चाह में बाहरी लोगों को कमरें या दुकान न दें और अगर दें तो उसका उसी समय पुलिस से सत्यापन करवा लें। अपनी जिम्मेदारी समझे, पुलिस किस किस के दरवाजे पर जाकर पूछेगी की आपके यहां कोई बाहर का व्यक्ति है ? कार्य के लिए आई लेबर को बस्तियों में बिल्कुल न शरण दे और ठेकेदार को कहें कि पहले पुलिस द्वारा किया गया सत्यापन दिखाओ कि आपके साथ कितने लोग हैं और कहाँ के हैं। अगर ठेकेदार की लेबर कुछ ऊंच नीच करें तो ठेका निरस्त करने का प्रावधान हो औरपुनः राज्यमें रोजगार पर प्रतिबंध हो, दोषी को सख्त सजा का प्रवधान हो। लेकिन यह सब तभी हो सकेगा जब आप पुलिस प्रशासन का साथ दें।  

अभिभावक अपने बच्चों की एक्टिविटी पर ध्यान दें। बच्चों के बैग से लेकर जूतों के अंदर तक झांके। बच्चों को खुद से दूर न रखें और अगर रखें तो उसकी बराबर मोनेटरिंग करें। आज के जमाने में यह सब कोई बड़ा काम नही है अगर माता पिता चाहेंतो यह काम भी आपके लिए पुलिस कर सकती है। बस आपको खुद को जागरूक रखने की जरूरत है। समय समय पर बच्चों की अच्छे लोगों से कॉउंसलिंग करवाए ताकि उनमें सकारात्मक सोच बनी रहे। हमारी इस मुहिम में सहयोग करें। खबर जन जन तक पहुंचे और लोग अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए जागरूक बने।