अंग्रेजी के इस दौर में भारत के बच्चे भले ही इंग्लिश माध्यम स्कूलों से पढ़ना पसन्द करते हों, लेकिन सात ससंदर पार उत्तराखंड के टिहरी जिले का एक लाल अंग्रेजी भाषी लोगों को हिंदी का ज्ञान बांट रहा है। आपको बता दें कि केवल भारत में ही नही बल्कि विश्व के कई देशों में हिन्दी को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। इसी कड़ी में टिहरी के मूल निकासी प्रोफेसर रामप्रसाद भट्ट भी अपनी सेवाएं विदेशियों के बीच रहकर दे रहे हैं।

प्रोफेसर रामप्रसाद भट्ट का जन्म भल्डगांव (जिला टिहरी गढ़वाल) में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा भी टिहरी जिले में ही सम्पन्न हुई। स्नातक के बाद रामप्रसाद भट्ट ने श्रीनगर गढ़वाल विश्विद्यालय से हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि ली और बतौर शिक्षक देहरादून में हिंदी पढ़ाने लग गये। इस बीच वह दूसरे देशों के लिए जाने का प्रयास भी करते रहे और अंत में जर्मनी चले गये।

आपको यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा कि टिहरी गढ़वाल का यह लाल जर्मनी की हैंबर्ग यूनिवर्सिटी में बतौर हिंदी प्रोफेसर कार्यरत है। अपनी सेवाओं को सुदृढ बनाने और अंग्रेजों में हिंदी की समझ को पैदा करने के लिए उन्होंने "हिंदी एक गहन अध्यन" नाम से विशेष अध्ययन परियोजन भी शुरू किया हुआ है जिसमें उनसे सैकड़ो लोग हिंदी की शिक्षा लेने आते हैं। प्रोफेसर रामप्रसाद बताते हैं कि इस हिंदी सहयोग कार्यक्रम को चलाते हुए उनको 14 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक उनसे लगभग 650 से अधिक लोग हिंदी का ज्ञान पाकर अपने देशों को लौट गये हैं। जिसमे नीदरलैंड, पोलैंड, इटली और डेनमार्क समेत कई यूरोपियन देशों को लोग सम्मिलित हैं।