तेजपत्ता को घर के आंगन से लेकर जंगल तक में लगा सकते हैं। तेजपत्ता का पेड़ लगभग छह से पंद्रह मीटर ऊंचे होते हैं। यह सदाबहार पेड़ है। तेजपत्ता मसाले के रू प में काम आते हैं। इसका प्रयोग मसालों में किया जाता है। तेजपत्ता की जड़े भूमि को जकड़े रहती हैं जिसके चलते भू क्षरण कम होता है। अपनी खूशबू से आसपास के क्षेत्र को सुगंधित रखता है। तेजपत्ता उत्तराखंड के गढ़वाल तथा कुमाऊँ दोनों ही मंडलों में पाया जाता है । लेकिन कुमाऊँ क्षेत्र में इसका व्यापार इतना अधिक बढ़ चुका है कि पिथौरागढ़ जिले के काश्तकारों की तकदीर बदलने लगा है।


चार हजार से लेकर सात हजार फीट तक की ऊंचाई में तेजपत्ता का उगाया जाता है। साढ़े पांच हजार फीट से सात हजार फीट की तेज पात की मांग लगातार बढ़ रही है। मुनस्यारी के तेजपत्ता 70 से 75 रु पाव बिक रहे हैं तो अन्य स्थानों के तेजपत्ता 60 से 70 रुपये पाव है। मुुनस्यारी का तेजपत्ता दक्षिण के केरल से विदेश तक पहुंच रहा है। मीठा तेजपत्ता के नाम से प्रचलित इसका उपयोग मसालों के साथ ही आयुर्वेद व अन्य चिकित्सा पद्यतियों में औषधि के रूप में किया जाता है। इस वर्ष जिले से 75 ट्रक तेजपत्ता मंडियों तक जा रहा है, जिसका मूल्य एक करोड़ तीस लाख रुपये है।


सीमांत की मुनस्यारी में पांच हजार से सात हजार तक की ऊंचाई वाले स्थानों के तेजपत्ता दिल्ली मंडी पहुंचने के बाद यूरोप, दक्षिण कोरिया और अरब तक पहुंचने लगे हैं। तेजपत्ता उगाने वाले काश्तकारों की आय बढ़ रही है। जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।