उत्तराखंड में लगातार भालुओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वन विभाग से यह मांग की जा रही है की ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बढाई जाय। कुमाऊँ व गढ़वाल के अधिकांश जिलों में भालू सक्रिय हैं ऐसे में ग्रामीण मवेशियों के घास कैसे लाए। ताजा मामला उत्तरकाशी जिले से सामने आया है जहाँ तीन महिलाओं ने कठिन संघर्ष के बाद अपनी जान बचाई।

डुंडा ब्लाक के धनारी क्षेत्र में संताण गांव की तीन महिलाएं दोपहर के समय घास लेने गांव के पास जंगल में गई थीं। दोपहर करीब ढाई बजे झाड़ी में छिपे भालू ने इन महिलाओं पर हमला कर दिया। महिलाओं ने पूरी बहादुरी दिखाते हुए भालू के साथ करीब आधा घंटे तक मुकाबला किया। जीवन और मौत के इस संघर्ष में महिलाओं ने लगातार भालू पर प्रहार जारी रखे और अंत में भालू हार मानकर लौट गया।

भालू के हमले में संताण गांव निवासी पूर्णमासी देवी (38) पत्नी लक्ष्मण सिंह को गंभीर चोटें आईं, जबकि भालू से भिड़ंत में शामिल राजी देवी एवं पूर्णा देवी ठीक हैं। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे फॉरेस्टर अरविंद सिलवाल एवं वन रक्षक सुरेश चौहान ने घायल महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद डॉक्टर ने महिला की हालत खतरे से बाहर बताई है। वन क्षेत्राधिकारी नागेंद्र रावत ने अस्पताल पहुंचकर महिला का हाल जाना और प्राथमिक सहायता के तौर पर 15 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा।