लॉकडाउन में सरकार ने गाय पालन पर किए करोड़ो खर्च, रिपोर्ट में जो सामने आया उससे उड जाएंगे आपके होश ।

 


उत्तराखंड राज्य में कोरोना काल के वक्त घर लौटे नौजवान युवाओं को सरकार ने जिन योजनाओं की सौगात दी थी उनमें से एक महत्वपूर्ण योजना थी गौ पालन और दुग्ध व्यवसाय योजना । लेकिन अब गौ पालन और दुग्ध व्यवस्था में अन्य पशुओं की जो रिपोर्ट आई है उससे आप भी चौंक जाएंगे । वर्ष 2019-20 के दौरान की गई 20 वीं पशुगणना में ये आंकड़े सामने आए हैं। इस गणना में गाय, भैंस, भेड़ जैसे महत्वपूर्ण पशुओं की संख्या में गिरावट आई है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य में वर्ष 2012 में गायों की संख्या 20.06 लाख थी जो वर्ष 2019 में आते आते घटकर 18.52 लाख रह गई है। इन आंकड़ों पर ध्यान देना इसलिए भी जरूरी है कि वर्ष 2014 से गौ संरक्षण की बातें तो हो रही हैं लेकिन गौ संरक्षण हो नही रहा है। प्रदेश में सरकार भी भाजपा की है और गौ संरक्षण का नारा भी भाजपा सरकार का ही है, ऐसे में गायों की संख्या में आई कमी का आंकलन करना वर्तमान सरकार का प्रथम धेय होना चाहिए।

इसके साथ ही प्रदेश में अन्य दुधारू पशुओं की स्थिति भी अच्छी नही है। भैंस और भेड़ों की संख्या में भी गिरावट देखने को मिली है। राज्य में वर्ष 2012 में 9.88 लाख भैंसे व 3.69 लाख भेड़ें थी जो वर्ष 2019 में 8.66 लाख व 2.84 लाख रह गयी हैं। राज्य की राजधानी में दूध की सप्लाई उत्तर प्रदेश सहारनपुर से हो रही है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल करोड़ो रुपयों से जो योजनाएं बनती है उनका फायदा किसको होता है ।

इन सब के बीच राहत की एक खबर यह है कि मुर्गी व बकरी पालन में हल्का उछाल देखने को मिला है। यह दोनों ही जीव माँस के लिए उपयोग में लाये जाते हैं। वर्ष 2012 में राज्य में 46.42 लाख मुर्गियां व 13.67 लाख बकरियां थी जो वर्ष 2019 में बढ़कर 50.18 लाख व 13.71 लाख हो गई हैं।

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