आधार कार्ड के चलते राज्य में 5 लाख यूनिटों को किया गया निरस्त, नही दिया जाएगा अनाज ।


राज्य में वन नेशन वन राशनकार्ड योजना लागू की गई है। ऐसे में अब प्रदेश के नागरिक किसी भी जिले से सरकारी राशन प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नही, जो लोग राज्य के बाहर दूसरे राज्यों में रह रहे है वह भी सरकार द्वारा दिया जाने वाला राशन ले सकेंगे। इस योजना को सफल बनाने के लिए आधार कार्ड की अहम भूमिका है। राज्य नागरिकों के राशन कार्ड अब आधार नम्बर से लिंक होंगे और राशन कार्ड के स्मार्ट फीचर के साथ परिवार की डिटेल के साथ यह पता किया जा सकेगा कि आप किस राज्य के नागरिक हैं और कहीं आप किसी दूसरे राशन कार्ड से तो नही जुड़े हुए हैं।


प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान (एनएफएसए) के 13.30 लाख राशनकार्डधारक हैं। अंत्योदय समेत एनएफएसए के अंतर्गत 61.94 लाख व्यक्तियों को सस्ता खाद्यान्न योजना का लाभ मिल रहा है। केंद्र की वन नेशन वन कार्ड योजना के तहत सभी राशनकार्डों में शामिल यूनिट की आधार सीडिंग अनिवार्य है। शत-प्रतिशत राशनकार्ड और यूनिट की आधार सीडिंग कराने वाले राज्यों में पड़ोसी राज्य हिमाचल पहले ही शामिल हो चुका है।

उत्तराखंड बीते माह अगस्त से ही वन नेशन वन कार्ड योजना लागू कर चुका है। लेकिन तकरीबन 99 फीसद से ज्यादा राशनकार्डधारकों की आधार सीडिंग के बावजूद उनमें शामिल यूनिट को शत-प्रतिशत आधार से जोड़ने में लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। खाद्य विभाग की मुहिम के बावजूद शत-प्रतिशत यूनिटों की आधार सीडिंग में संबंधित व्यक्तियों से सहयोग नहीं मिलने की समस्या भी पेश आई। इस अड़चन दूर करते हुए सरकार ने आधार सीडिंग से दूरी बनाने वाली पांच लाख यूनिट को एनएफएसए योजना से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

यह मामला पिछले दिनों जोरशोर से विधानसभा सत्र के दौरान भी उठ चुका है। खाद्य सचिव सुशील कुमार ने बताया कि एनएफएसए से बाहर की गईं यूनिट को दोबारा राशनकार्ड में शामिल करने का विकल्प खुला रखा गया है। सरकार किसी भी पात्र को सस्ता खाद्यान्न योजना से वंचित नहीं करना चाहती। इसलिए जिलों को यूनिट की आधार सीडिंग कराते हुए राशनकार्ड में दर्ज करने के लिए लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 85 फीसद आधार सीडिंग का सत्यापन भी किया जा चुका है।

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