बढ़ती सुविधाओं के साथ बच्चे असहज होते जा रहे हैं। शिक्षा के स्तर में आई गिरावट ने कहीं न कहीं बच्चों की मानसिकता पर भी प्रभाव डाला है। पिता जो दिन रात मेहनत करके परिवार के भरण पोषण का कार्य करता है उसकी बात से ही अगर बच्चा इतना असहज हो जाए कि आत्महत्या जैसे कदम उठा ले तो यह इस राज्य की युवा पीढ़ी का दुर्भाग्य है। अपना भला और बुरा न समझने वाला बच्चा कहीं न कहीं आचरण और आदर्श की शिक्षा से दूर होता जा रहा है। पाठयक्रम के साथ हुए परिवर्तन में हमने आदर्शवादी शिक्षा को कहीं पीछे छोड़ दिया है। तकनीकी की दौड़ में हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं यह सोचने वाली बात लेकिन हमे तकनीकी का सिर्फ एक पहलू दिखता है उसका दूसरा पहलू हम नजरअंदाज करके चल रहे हैं।

नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में एक किशोर ने घर पर ही फांसी लगा ली, वजह थी पिता की डांट। मल्लीताल कोतवाली क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपने 17 वर्षीय पुत्र को किसी बात को लेकर डांट दिया। जिससे क्षुब्ध होकर बेटे ने घर के अंदर ही छत पर कुंडी से रस्सी फंसा कर फांसी लगा ली। परिजनों को जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने बेटे को नीचे उतार तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना के बाद एसआई हरीश सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। जहां से वह किशोर को लेकर बीडी पांडे अस्पताल लाए। मगर अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एसएसआई कश्मीर सिंह ने बताया कि किशोर शहर के विद्यालय में कक्षा नवीं का छात्र है। बीते कुछ समय से किशोर डिप्रेशन का शिकार चल रहा था। जिसको लेकर परिजन उसका उपचार भी करा रहे थे। बताया कि परिजनों द्वारा डांटने के कारण किशोर के आत्महत्या कर ली। पुलिस मामले की जांच की जा रही है। बुधवार को शव मोर्चरी में रखा गया था। गुरुवार को पंचनामें और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।