उत्तराखंड में इस समय 3500 से अधिक छोटे बड़े पुल हैं। इनमें से कुछ पुल आजादी के समय के भी हैं। जो समय के साथ साथ कमजोर हो रहे हैं। पुराने समय में प्रदेश में जितने पुल बने हैं वे बी क्लास के हैं। अर्थात यह पुल दस टन तक के ही वाहनों का भार उठाने में सक्षम हैं। अब समय के साथ तकनीक बदली है और अब ऐसे वाहन भी आए हैं जो 16 टन और उससे अधिक तक का भार लेकर चलते हैं। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में 71 ऐसे पुलों की पहचान की है जो भारी वाहनों का भार उठाने में सक्षम नहीं है। अब इन पुलों को बदलने की तैयारी चल रही है। एशियन डेवलपमेंट बैंक अथवा विश्व बैंक के सहयोग से इनके स्थान पर नए पुलों का निर्माण कराए जाने पर विचार चल रहा है।

इस समय प्रदेश में दो प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की परियोजना पर काम चल रहा है। इनमें से एक चारधाम आल वेदर रोड और दूसरी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना है। इनके कार्यों की प्रकृति के हिसाब से यहां बड़ी-बड़ी मशीनों को लाया जा रहा है। जिनका भार दस टन से अधिक है। इसके अलावा प्रदेश में जल्द ही भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत भी बड़े मार्गों का निर्माण होना है। इसे देखते हुए कुछ समय पहले लोक निर्माण विभाग ने सभी पुलों का सर्वे कराने का निर्णय लिया था। इसका मकसद यह देखना था कि प्रदेश के कितने पुल इतना भार उठाने में सक्षम हैं। इसके अलावा इनमें कितने पुल ऐसे हैं जो वक्त के साथ कमजोर हो रहे हैं। सचिव लोक निर्माण विभाग आरके सुधांशु का कहना है कि यह देखा जा रहा है कि कितने पुल ऐसे हैं जिन्हें बदलने की जरूरत महसूस हो रही है। इन पुलों के स्थान पर विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से नए पुलों का निर्माण किया जाएगा।