उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में किसानों का भाजपा का विरोध करना कहीं चुनावी माहौल में भारी न पड़ जाए। पहले कुमाऊँ मण्डल से विरोध के बैनर लगे और अब हरिद्वार से भी कुछ ऐसी ही तस्वीरे निकल कर आ रही हैं। भले ही दावा किया जा रहा है कि किसान आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड में हरिद्वार के कुछ गांवों में इस दावे के विपरित ऐसे बोर्ड लगाए दिए गए हैं, जो कई सवाल खड़े कर रहा है। बोर्ड पर लिखा गया है कि भाजपा नेताओं का गांव में आना मना है।

विपक्षी दल भी मौके को भुनाने में कोई कसर छोड़ना नही चाहते हैं और शायद राजनीति में होता भी यही है। भले आज भाजपा विपक्षी दलों पर आरोप लगाए लेकिन जब भाजपा खुद विपक्ष में थी तो वह भी ऐसे ही मौके भुनाया करती थी। खैर ये कोई नई बात नही है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि किसानों द्वारा खुले आम इस प्रकार के बैनर लगाना एक पार्टी विशेष के लिए चिंता का विषय जरूर हो सकता है। हालांकि इसमें भी विपक्ष काहाथ हो सकता है लेकिन सत्ताधारी पार्टी के लिए दबाव जैसी स्थिति जरूर बनती दिख रही है।

इस समय देशभर में किसान आंदोलन चल रहा है। उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी किसान आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है। पर हरिद्वार जिले के रुड़की में नारसन क्षेत्र के नारसन कला, खेडा जट, ब्रहमपुर और नगला सलारू समेत पांच गांव में कुछ बोर्ड और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इसमें लिखा गया है कि इस गांव में भाजपा नेताओं का आना सख्त मना है। रातोंरात लगे यह बैनर और होर्डिंग्स चर्चा का विषय बने हुए है। हालांकि सूत्रों कि माने तो यह बैनर किसान नही बल्कि भाकियू संगठन खुद उन गांवों में लगवा रहे हैं जहां से कृषक परिवार के लोग किसान आंदोलन में शामिल होने गए हैं। टकराव की स्थिति न बने, इसको देखते हुए स्थानीय पुलिस भी सक्रिय हो चली है। गांव में जाकर ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि इस तरह के बोर्ड ना लगाए जाए और जो लगाए गए हैं उनको हटाया जाए।