पहाड़ समीक्षा


उत्तराखंड में केंद्रीय बजट को किसी ने सराहा तो किसी को निराश मिली। बजट को व्यापारी वर्ग ने जमकर सराहा है। व्यापारियों का कहना है कि बजट में व्यापारियों के साथ ही आमजन का पूरा ख्याल रखा गया है। बजट से घरेलू शेयर बाजार में भरपूर तेजी देखने को मिलेगी। ऑडिट की सीमा पांच से 10 करोड़ तक बढ़ा दी गई है। इससे व्यापारियों को लाभ होगा। बजट बहुत संतुलित और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संयमित तरीके से बनाया गया है। व्यापार की दृष्टि से कुछ विशेष उपलब्धियां नहीं होते हुए ठीक-ठाक लगता है। टैक्स देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रलोभन दिया जाना चाहिए था। 75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को आयकर रिटर्न भरने में छूट दिया जाना स्वागत योग्य है। ऑनलाइन व्यवस्था में लगाम लगाई जानी चाहिए थी, जिससे भारतीय बाजार प्रणाली को राहत प्रदान किया जा सके। सरकार ने सोने में कस्टम ड्यूटी को घटा कर 12.50 से 7.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका सभी सराफा व्यवसायी उत्साहित हैं। सरकार के इस फैसले से सराफा व्यापार की दिक्कतें कम होने की उम्मीद है।

नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि आम बजट से उन्हें निराशा हाथ लगी है। कर्मचारी वर्ग आयकर सीमा में किसी तरह की रियायत न मिलने से सबसे ज्यादा मायूस है। बढ़ती महंगाई और कोरोना काल के इस दौर में कोई छूट न मिलना निराश करता है। कर्मचारियों के लिए बजट मायूस करने वाला है। कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे थे कि आयकर स्लैब में छूट मिलेगी। कर्मचारियों के लिए बजट में कुछ भी नहीं मिला। 75 साल से अधिक के पेंशनर्स को आयकर में छूट मिली है। नौकरीपेशा को इसमें सिर्फ नाउम्मीदी ही हाथ लगी है। आम बजट सरकारी कर्मचारियों के लिहाज से ठीक नहीं लग रहा है। कोरोना काल में सबसे अधिक पर्यटन विभाग और पर्यटन कारोबार को नुकसान हुआ। इस हिसाब से भी बजट में कुछ खास प्रावधान नहीं हैं।

इस बजट में कभी खुशी कभी गम जैसी फीलिंग है। रसोई गैस के दामों में रिरायत न मिलने से महिलाओं में निराशा है । आम बजट से महिलाओं को खासी उम्मीदें थीं, लेकिन महिला वर्ग के लिए कुछ खास नहीं रहा। उम्मीद थी कि सरकार रसोई गैस में सब्सिडी को बढ़ाएगी, ताकि महंगी रसोई गैस से निजात मिलती। पिछले कई महीने से लगातार रसोई गैस के दाम बढ़ रहे हैं और सब्सिडी भी खत्म होने के कगार पर है। रेल बजट में नई रेल परियोजनाओं और ट्रेनों के संचालन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से लोग निराश हैं। यात्रियों का कहना है कि उन्हें कोरोना संकट के दौर में किराये में कमी के साथ ही नई ट्रेनों के संचालन और सुविधाओं को लेकर नई घोषणाएं होने की उम्मीद थी, लेकिन रेल बजट में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने के अलावा कुछ भी प्रावधान नहीं किए गए हैं।

चुनावी साल में भी उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलने की आस पूरी नहीं हो पाई है। पिछले कई वर्षों से पर्यावरणीय सेवाओं के बदले विशेष अनुदान के गुहार लगा रही प्रदेश सरकार को इस बार केंद्रीय बजट से काफी उम्मीदें थीं। इस मांग के समर्थन में राज्य सरकार ने बाकायदा तार्किक आधार तैयार किया था। लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी। पिछले दिनों आम बजट की तैयारी को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तराखंड की प्राथमिकताओं पर चर्चा की थी। उस दौरान शासकीय प्रवक्ता व वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने राज्य की जो प्राथमिकताएं वित्त मंत्री के सामने रखी, उसमें ग्रीन बोनस की मांग भी शामिल थी। इस मांग को उठाने से पहले ग्रीन बोनस की मांग को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर काफी होमवर्क किया गया था। नियोजन विभाग ने बाकायदा पर्यावरणीय सेवाओं की अकाउंटिंग के जरिये केंद्र से करीब सात हजार करोड़ रुपये सालाना अनुदान का आधार तैयार किया था। यह मांग ने कौशिक ने वित्त मंत्री के समक्ष रखी भी, लेकिन केंद्रीय बजट में शुद्ध हवा के लिए 2000 करोड़ की धनराशि और बढ़ाकर 6000 करोड़ तो किया गया, लेकिन ग्रीन बोनस का जिक्र तक नहीं हुआ।

केंद्रीय बजट में ग्रीन बोनस न मिलने से मायूस उत्तराखंड को 15वें वित्त आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने राज्य को राजस्व घाटा व अन्य सेक्टर के लिए अनुदान के रूप में पांच साल के लिए 42,611 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है, इसमें 28,147 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान के हैं। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में पांच साल में 47,234 करोड़ रुपये अलग से मिलेंगे। इस तरह आयोग ने उत्तराखंड के लिए करीब 90 हजार करोड़ (89,845 करोड़) की सिफारिश की है। पंचम राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष इंदु कुमार पांडेय के मुताबिक, 14वें वित्त आयोग के राजस्व घाटा अनुदान न देने से उत्तराखंड से जो नाइंसाफी हुई थी, 15वें वित्त आयोग ने उसकी भरपाई कर दी। आयोग ने अपनी अंतरिम सिफारिश में उत्तराखंड को राजस्व घाटा अनुदान देने पर सहमति दी थी, लेकिन राज्य को उसकी फाइनल रिपोर्ट का इंतजार था। सोमवार को संसद में पेश आयोग की रिपोर्ट में राजस्व घाटा अनुदान देने का जिक्र है। यह करीब 42,614 करोड़ रुपये होगा।

क्या चाहती थी उत्तराखंड सरकार जो नही मिला ?
१- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 150 की आबादी का मानक पूरा नहीं हुआ।
२- सीमांत क्षेत्र विकास के लिए भी अलग से अनुदान चाह रहा था उत्तराखंड।
३- मनरेगा योजना में श्रम सामग्री के अनुपात को 50: 50 कराने की मांग थी।
४- प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में गांवों में घर बनाने की धनराशि को 1.30 लाख से बढ़ाकर दो लाख किया जाए।
५- स्वरोजगार के लिए दिए जाने वाले ऋण को दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख किया जाए।
६- गोरीकुंड-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड और नैनीताल रोपवे निर्माण केंद्रीय योजना में शामिल हो ।
७- छोटे उद्योगों की मदद के लिए रूरल बिजनेस इक्यूबेटर की स्थापना को वित्तीय मदद दे केंद्र।
८- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत सहायता राशि को 35 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए ।