कभी महज 450 में मिलने वाला सिलिंडर भाजपा को बहुत महँगा लगता तो धरना देने सड़कों पर चले आते थे आज उसी गैस के दाम डेढ़ गुना बढाके राष्ट्र विकास की बात करते हैं। 2021 केंद्रीय बजट में एक बार भी गैस के बढ़े दामों पर चर्चा नही हुई, मतलब साफ है विपक्ष में संख्या बल नही तो सत्ता के नशे में चूर जैसा मर्जी वैसा फैसला करें क्या फर्क पड़ता है। दरअसल, ये एक सोची समझी रणनीति के तहत खेला जा रहा खेल है लेकिनआम जनता की समझ में आते आते राज्य सरकार चुनावी खेल की पूरी तैयारी कर चुकी होगी। खैर, जो लोग महज सोचा चांदी के गिरे दामों पर बिल की तारीफ में कसीदे पढ़ रहें हैं उनको गैस के दामों से क्या लेना देना।

ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चमन लाल ने बताया कि पहले सिलिंडर 713 रुपये का मिलता था, जिसमें 16 रुपये सब्सिडी बैंक खाते में आती थी। अब यह सिलिंडर 738 रुपये का मिलेगा। कुलमिलाकर रसोई गैस सिलिंडर (14 किग्रा) 25 रुपये महंगा हो गया है। गुरुवार सुबह से शहर की गैस एजेंसी ने नए दाम लागू कर दिए। इससे पहले व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमत में भी इजाफा किया गया था और साथ ही 05 किलो के सिलिंडर में भी 33 रुपये का इजाफा किया गया था।

भाजपा के केंद्रीय नेता कहते हैं कि सब पैसा देश हित में लग रहा है तो लोग चिपचाप दिए जा रहे हैं। देश में बुझदिली इस कदर हावी हो गई है कि पत्रकारों में तक सत्ता से सवाल करने की हिम्मत बाकी नही है। इस वर्ष शब्जियों के दामों पर नजर डालें तो इस समय 05 रुपये किलो बिकने वाला आलू 10 से कम आया ही नही। जानते हैं क्यों ? क्योंकि तेल की बढ़ी कीमतें और टोलटैक्स का भाड़ा भी अप्रत्यक्ष रूप से आपकी जेब से वसूला जा रहा है। खैर सरकार ने सोना चांदी सस्ता कर दिया है तो सोना चांदी खाइए और दिमाग को ताकतवर बनाइए।