पहाड़ समीक्षा


उत्तराखंड में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन सरकार बेरोजगार युवाओं को चुनावी माहौल में वोट पाने के लिए झूठी विज्ञप्तियां दिखा रहा है। हकीकत तो यह है कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार देना ही नही चाहती है। और अगर देना चाहती है तो फिर रिटायरमेंट हुए लोगों को दोबारा नियुक्ति देने का मतलब ही क्या है। आज जहां राज्य का युवा 10 से 15 हजार की नौकरी पाने के लिए तरस रहा है वहां सरकार इस प्रकार के निर्णय ले तो कहीं न कहीं सरकार की करणी और कथनी में अंतर जरूर है। राज्य में टेक्निकल क्षेत्र से स्नातक करने वाले लाखों युवा बीते चार पांच सालों से सरकार का मुह ताक रहे हैं और सरकार है कि युवाओं को ठेंगा दिखाकर रिटायर कर्मचारियों को ही दोबारा नियुक्ति दे रहा है।

एक ओर प्रदेशभर में बेरोजगारों की फौज दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वहीं वन निगम रिटायर कर्मचारियों पर मेहरबान हो रहा है। वन निगम के एमडी ने खाली पड़े पदों पर निगम के ही रिटायर कर्मचारियों को दोबारा रखने के आदेश कर दिए हैं। वन निगम में हर साल बड़ी संख्या में कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, लेकिन भर्तियां नहीं हो रही हैं। जिससे निगम में स्केलर सहित कई संवर्गों के 70 फीसदी से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इनमें कुछ पद आउटसोर्स से भरे गए हैं, लेकिन इससे निगम का काम नहीं चल रहा। ऐसे में कर्मचारियों की बड़ी संख्या में जरूरत है। निगम के एमडी विनोद सिंघल ने इन पदों पर निगम के ही रिटायर कर्मचारियों को रखने के आदेश कर दिए हैं। साथ ही उनके लिए मानदेय 20 हजार फिक्स कर दिया है। जबकि आउटसोर्स पर रखे जाने वाले बेरोजगारों को निगम में इसी काम के लिए 15 हजार रुपये दिए जाते हैं। इससे बेरोजगार संगठनों और कर्मचारी संगठनों में भारी रोष है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार का आरोप है कि 65 साल तक के रिटायर कर्मचारी जहां फील्ड में कम काम कर पाएंगे।

राज्य के बेरोजगार संगठन भी राजनीति की भेंट चढ़ चुके हैं। ऐसे संगठनों की शायद अब बेरोजगार युवाओं को जरूरत ही नही है जो समय पर बेरोजगार युवाओं के लिए आवाज ही न उठा सकें। खबर फैलने के बाद वन मंत्री जरूर हरकत में आए हैं, उन्होंने कहा कि वन निगम में जो भी पद खाली हैं उनमें जरूरत के अनुसार आउटसोर्स से बेरोजगारों को नौकरी दी जानी चाहिए। जहां तक काम के अनुभव की बात है तो स्थायी भर्ती में भी नए लोगों को रखकर काम लिया जाता है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। बेरोजगारों के हितों की हर हाल में सुरक्षा की जाएगी।

लेकिन इतने पर ही बेरोजगार युवा खुश न हों क्योंकि खेल सारा यही नेता लोग बैठकर खेल रहे हैं। पहाड़ समीक्षा इस फैसले की निंदा करता है। जहां लाखों युवा बेरोजगार हो वहाँ इस प्रकार ले फैसले आये तो शर्मनाक है। वन विभाग कौनसा अपने आप में बहुत सक्षम है और अगर होता तो शर्दियों में जंगल ऐसे नही धधक रहे होते। सरकार तो चाहिए था कि नकारे कर्मचारियों को निकालकर युवाओं को मौका दे लेकिन हो इसके विपरीत रहा है। पढा लिखा युवा इस बात को समझ रहा होगा कि ये सब किसके इशारों पर हो रहा है।