एक तरफ सरकार निःशुल्क इलाज की सौगात की बात कर रही है तो दूसरी तरफ पेंशनेरों से भी मोटा पैसा वसूल रही है। अब तक गोल्डन कार्ड से इलाज करने वाले कई पेंशनेरों ने बताया कि इलाज के नाम पर हस्पताल एक दो दिन की दवा से ज्यादा नही देते हैं। ऐसे में पेंशन से कटने वाले पैसों से उनको कोई ज्यादा लाभ नही मिल रहा है। इन्ही सब सम्याओं को लेकर बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन चमोली शाखा ने धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि अटल आयुष्मान योजना के तहत पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों से उपचार के नाम पर बहुत ज्यादा कटौती की जा रही है। उन्होंने प्रदेश के अन्य नागरिकों की भांति पेंशनरों को भी नि:शुल्क पांच लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा देने की मांग उठाई।

यही हाल पौड़ी जिले का भी जहां अभी तक गोल्डन कार्ड बने ही नही लेकिन सरकार ने पेंशन में से कटौती शुरू कर दी है। गोल्डन कार्ड बनाए बिना वेतन में कटौती करने से कर्मचारियों में आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन से की गई कटौती को जल्द ही वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सरकार व कोषाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी।

उत्तरकाशी में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए। उन्होंने कटौती बंद करने व पेंशनर्स को भी आम नागरिकों की भांति पांच लाख तक के गोल्डन कार्ड बनाकर निशुल्क उपचार मुहैया कराने की मांग की। नई टिहरी से सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर संगठन ने आयुष्मान और गोल्डन कार्ड के नाम पर मेडिकल सुविधा देने का बहाना बनाकर पारिवारिक पेंशन से प्रति माह कटौती करने पर रोष जताया है। संगठन से जुड़े लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सीएम को ज्ञापन भेजा। उधर नरेंद्रनगर में संगठन ने विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस निकाला।

पेंशनेरों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने उनकी बात न मानी तो फरवरी के अंत तक आंदोलन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। गौरतलब है कि यहां भी भाजपा ने सड़को वाली नीति ही अपनाई है कि पहले सड़के बनाओ और फिर टोल टैक्स लगा कर लोगों से कई गुना पैसा वसूल कर लो। यहाँ भी ठीक यही नीति अपनाई गई है, वृद्ध पेंशनेरों और सरकारी कर्मचारियों से पैसा वसूल करों और बदले में उनको उस पैसे का पूर्ण लाभ भी न दो। अशिक्षित और बेरोजगार तबके में मुफ्त का इलाज जैसा भ्रम पैदा करो और वोट की राजनीति करो। खैर पढालिखा तबका तो विश्लेषण कर ही रहा है, घिनौनी राजनीति से कब तक राज करोगे ये जनता एक बार सवाल तो जरूर करेगी।