उत्तराखंड पहाड़ी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छुपी नही हुई है। न पर्याप्त शिक्षक हैं और न उचित छात्र संख्या। ऐसे में सरकार ने धीरे धीरे कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बन्द करने का फैसला लिया और बहुत से स्कूलों पर ताले लटक गए। सरकार के इस कदम से कुछ क्षेत्रों में रह रहे बच्चों की शिक्षा पर इसका बेहद दुष्प्रभाव पड़ा और कई बच्चों ने तो स्कूल ही छोड़ दिया। उचित व्यवस्था के अभाव में लोगों ने धीरे धीरे पलायन शुरू किया जिससे स्कूल भी धीरे धीरे खाली होते गये और फिर अंत में स्कूलों में रह गये सिर्फ गरीब तबके से आने वाले लोगों के बच्चे। अभिभावक सम्मेलन में कोई शिक्षकों को कुछ कहने वाला बचा नही तो शिक्षकों ने भी स्कूल राम भरोसे छोड़ दिए, परिणाम यह हुआ कि लोगों ने अपने बच्चों के लिए गांव ही छोड़ दिए और मजदूरी करके बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने लगे।

ऐसा ही कुछ हुआ था जखोली ब्लॉक, ग्राम पंचायत पपडासू के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मल्यासू के साथ। घटती हुई छात्र संख्या से इस स्कूल पर वर्ष 2017 में बन्द होने के बादल मंडरा रहे थे और शिक्षण सत्र 2018-19 में सरकार ने इस स्कूल को बन्द कर दिया था। सरकार पहाड़ी क्षेत्र में सिर्फ एक तरफा निर्णय से स्कूल बन्द करती गई लेकिन कभी यह नही सोचा कि स्कूलों में शिक्षा के स्तर के लिए आवश्यक शिक्षकों की स्थिति को सुधार जाय। सरकार के पास पूर्व से चल रहे स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नही थे, यह जानकर भी जगह जगह स्कूल खोले गये और पूर्व से चल रहे स्कूलों का उच्चीकरण किया गया। नतीजा यह हुआ कि जो स्कूल पूर्व से शिक्षकों का अभवा झेल रहे थे उनसे शिक्षक संख्या और कम हो गई। परिणाम यह हुआ कि कक्षा 01 से लेकर कक्षा 05 तक कई स्कूलों में एक ही शिक्षक से काम चलता रहा तो कहीं दो शिक्षकों से। यही हाल कक्षा 06 से 12वीं और कक्षा 06 से कक्षा 08 तक चल रहे स्कूलों का भी हुआ। लेकिन सरकार अपनी गलतियों को कभी नही मानती है।

अब राजनीति के गणितज्ञों को दोबारा याद आई तो दोबारा से ब्लॉक स्तरीय जांच निरीक्षण करवाया गया। गांव में लोगों से बातचीत भी की गई , जिसमें 08 अभिभावकों ने अपने बच्चों का विद्यालय में प्रवेश कराने पर सहमति जताई है। इस संबंध में अधिकारियों द्वारा डीईओ बेसिक को अवगत कराया गया। जखोली के उप शिक्षाधिकारी द्वारा विद्यालय परिसर का पुन: निरीक्षण किया जाएगा।