सोशल मीडिया पर असामाजिक गतिविधियों और राष्ट्र विरोधी हरकतों पर पुलिस की तिरछी नजर से अब कोई बच नही पाएगा। व्हाट्सएप हो या फेसबुक असामाजिक गतिविधियों में लिप्त लोगों को पुलिस ढूंढ निकालेगी और फिर ऐसे व्यक्ति के ऊपर दंड स्वरूप कारवाई की जानी तय है। पुलिस पासपोर्ट आवेदन और शस्त्र लाइसेंस में सत्यापन के समय सोशल मीडिया पर भी व्यक्ति का रिकॉर्ड खंगालकर रिपोर्ट लगाएगी। सत्यता पाए जाने पर आवेदन निरस्त भी किया जा सकता है। इससे पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस ही नहीं बल्कि नौकरी में आवेदन के समय भी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

डीजीपी अशोक कुमार ने बताया अभी तक सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी करने वालों के खिलाफ केवल आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता था। यदि कोई पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करता है तो उसके खिलाफ मुकदमों की जानकारी दी जाती थी। लेकिन, अब यह भी देखा जाएगा कि उसकी सोशल मीडिया पर किस तरह की गतिविधियां रहती थीं। यदि राष्ट्र विरोधी रहीं तो उसके खिलाफ निगेटिव रिपोर्ट लगाकर आवेदन रद्द कराने पर विचार किया जाता है।

गौरतलब है कि, किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से वह विभिन्न सेवाओं में बने जांच बैरिकेड में फंस जाएगा। इससे उसके खिलाफ विभागीय जांच का दायर भी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा। यह भी हो सकता है कि ऐसे व्यक्तियों को बहुत सारी सुविधाओं के लिए बार बार जाँच से गुजरना पड़े। ऑनलाइन परीक्षा आवेदनों में भी साफ निर्देशित एक कॉलम होता है जिसमें पूछा जाता है क्या आपके खिलाफ कोई मुकदमा हुआ है। ऐसे में आने वाले भविष्य में आपकी एक गलती बहुत भारी पड़ सकती है। डीजीपी प्रदेश में किसी भी तरह अराजक तत्वों को बढ़ावा देना नही चाहते हैं इसलिए वह पदभार संभाले के बाद से लगातार एक्शन में दिख रहे हैं।