नवप्रीत सिंह एक 25 वर्षीय विवाहित युवक था जो अपनी पत्नी के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहता था और पढ़ता था। नव्रीत सिंह ने भी भारत में चल रहे किसान आंदोलन में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की थी। उनके दादा, हरदीप सिंह डिबिबा, जो कई आंदोलनों में शामिल रहे हैं, ने सिख धर्म पर पांच किताबें लिखी हैं और सिंघू सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनके पोते ने भी वहां उनका साथ दिया था। 26 जनवरी, 2021 को नवप्रीत सिंह का निधन हो गया। सरकार का कहना है कि ट्रैक्टर पलटने से उसकी मौत हुई। उपस्थित लोगों ने नोट किया कि पुलिस द्वारा एक बंदूक की गोली के कारण, नव्रीत ने ट्रैक्टर का संतुलन खो दिया। जिस भी पत्रकार ने प्रदर्शनकारियों के संस्करण की सूचना दी, उनके नेतृत्व में एफआईआर दर्ज हुई।

इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है लेकिन पोस्टमार्टम में गोलमोल बातों से लिखी बातें पूर्ण रूप से साबित नही कर पा रही हैं कि नवप्रीत सिंह की मौत गोली लगने से हुई है। हाँ, रिपोर्ट में ये जरूर लिखा हुआ है कि मौत ब्रेन हैमरेज से हुई जो की सिर पर लगी चोट की वजह से हुआ। अब सवाल ये उठता है कि नवप्रीत सिंह के सिर पर चोट लगी कैसे ? नवप्रीत सिंह के दादा जी का कहना है कि नवप्रीत सिंह के पास हैवी विकल लाइसेंस था तो फिर ट्रेक्टर खिलोने की तरह कैसे पलट गया। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा उसके सिर पर गोली ट्रेक्टर पलटने से पहले ही लग चुकी थी और वह ट्रैक्टर पलटने से पहले ही मर चुका था।

देश के संविधान पर पूछे प्रश्न के जवाब में नवप्रीत सिंह के दादा जी ने कहा कि संविधान बनाने वालो ने संविधान को बड़ी बारीकी से अध्ययन करके बनाया था। संविधान में उनकी पूरी निष्ठा है लेकिन अंबेडकर जी ने जो एक लाइन लिखी थी कि संविधान देश के शासक के नजरिए पर निर्भर करता है वह अगर इसको देश हित के नजरिए से देखेगा तो विकास करेगा और इसमें खामियां देखेगा तो देश को दंगों में झोंक देगा। उन्होंने कहा कि देश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। बातों को सच से विपरीत दिखाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि वह देश के हर कृषि आंदोलनों में शरीक हुए लेकिन ऐसा आंदोलन इससे पूर्व कभी नही हुआ जहां किसानों पर गोलियां चलाई गई हों।