प्रदेश की जनता के साथ जो खिलवाड़ मौजूदा सरकार ने कोरोना के नाम पर किया है उसके लिए राज्य की जनता शायद ही तुम्हें कभी माफ करेगी। पत्रकारिता के बिके हुए लोगों से भी अब जनता यह सवाल जरूर पूछेगी कि आखिर पिछले आठ-दस माह में चौपट हुए उद्योग या धंधों पर तो आपने सरकार से एक सवाल नही पूछा लेकिन राज्य में बिना किसी आम जनता को कोरोना टिका लगे राज्य कोरोना मुक्त होने वाला है ये खबर प्रकाशित करते हुए तुम्हें लाज न आई। पिछले आठ -दस माह से खबरें छाप छाप ले लोगों को डराया और उनके धंधे चौपट किए और अब जब महज स्वस्थ्य कर्मियों को ही टिके लगे तो राज्य कोरोना मुक्त हो गया।

हैरानी होती है जब मीडिया क्षेत्र के प्रतिष्ठित अखबार भी इस तरह की रिपोर्ट बिना किसी विश्लेषण के लिखते हैं। किसी ने एक बार भी सरकार से नही पूछा कि महज 93,000 स्वस्थ्य कर्मियों को कोरोना का टिका लगने से राज्य कैसे कोरोना मुक्त हो गया ? क्या राज्य में कोरोना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों को ही हुआ था ? या यही स्वस्थ्य विभाग के लोग झूठे आंकड़े दिखा के लोगों को डरा रहे थे। पहाड़ समीक्षा ऐसी पत्रकारिता की घोर निंदा करता है जहां अभी स्वस्थ्य कर्मियों को ही दूसरा टिका पूरा न लगा हो और राज्य कोरोना मुक्ति की कागर पर आ गया हो।

राज्य में तमाम छोटे कारोबारी दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे हैं और आपको इतना बड़ा झूठ पर बुना हुआ अपराध नजर नही आता है तो पत्रकारिता निष्पक्ष नही है। अगर आपकी रिपोर्ट सच है और राज्य कोरोना से मुक्ति की तरफ अग्रसर है तो राज्य की जनता के साथ बहुत बड़ा छलावा किया गया है। क्योंकि बिना टिका लगे ही आम जनता अगर ठीक हो गई तो मतलब साफ है स्वस्थ्य विभाग द्वारा सरकार के इशारों पर बहुत बड़ा खेल खेला गया जिसमें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है।

राज्य में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में की गई कटौती और मध्यमवर्गीय समाज के धंधों में आई गिरावट पर माननीय कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए। आखिर कोरोना को लेकर सरकार और स्वस्थ्य विभाग ने मिलकर जनता में इतना बड़ा भ्रम कैसे खड़ा कर दिया कि एक करोड़ आवादी वाले राज्य में महज एक से डेढ़ लाख वैक्सिंग वह भी सिर्फ सिंगल टीकाकरण के साथ और बिना आम जनता के टीकाकरण के राज्य कोरोना मुक्त होने वाला है। बहुत बड़ा सवाल ? जवाब मांगेगी जनता ।