जैसे जैसे ममय बीत रहा है लोगों की अपनो को जिंदा पाने की आश भी टूटती जा रही है। ऐसे मैं डीजीपी का एक बड़ा बयान सामने आया है। उत्तरखंड के चमोली जिले में आई आपदा के बाद अब रेस्क्यू ऑपरेशन ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि अब किसी के जीवित बचने की आस नहीं है। ऐसे में अब अभियान ज्यादा से ज्यादा तीन दिन और चलाया जा सकता है। इसके बाद अभियान को बंद कर दिया जाएगा। आपको बता दें अब तक 58 शव बरामद किये गये हैं और लगभग 164 लोगों के लापता होने की खबर भी सामने आ रही है। आपनो का खोने का दुःख क्या होता है ये शायद परिजनों से बेहतर कोई नही समझ सकता है। पांच बहिनों के एक भाई के खोने का दर्द क्या होता है, ये वो लोग नही समझ सकते जिनको सिर्फ पैसे की भाषा समझ आती है। यही वजह है कि पहाड़ के भोले लोग अभी भी किसी चमत्कार की उम्मीद में आश बंधाये सरकार की तरफ राहत बचाव कार्य से एक दूसरे को ढांढस बांधे हुए है।

ऋषि गंगा की जल प्रलय के बाद से तपोवन सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) का बचाव दल रेस्क्यू अभियान में जुटा है। एनडीआरएफ की पांच टीमें (176 जवान) मलबे में लापता लोगों को ढूंढने और सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटी हैं। ऐसे में लोग बिलासपुर जैसे चत्मकार की दुआ कर रहे हैं। वर्ष 2015 में एनडीआरएफ ने हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में निर्माणाधीन सुरंग से नौ दिन बाद दो मजदूरों को सुराक्षित निकाला था। यहां कीरतपुर-नेरचौक फोर लेन परियोजना के सुरंग नंबर चार का एक हिस्सा धंस जाने से तीन लोग सुरंग में फंस गए थे। एनडीआरएफ के जवानों ने सुरंग में ड्रिल कर दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकाला था। एनडीआरएफ के प्रयास को देखते हुए लोगों को तपोवन सुरंग में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकाले जाने की उम्मीद है।

दूसरी तरफ डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि सुरँग में लोगों के जिंदा होने की आश थी इसलिए तेजी से कार्य किया गया। तमाम रुकावटों के बाबजूद एनडीआरएफ ने सुरँग में कार्य किया लेकिन अब लगता है कि सुरंग में भी शायद ही कोई जिंदा बचा हो। अब रेसक्यू ऑपरेशन कुछ समय के बाद बन्द कर दिया जाएगा। जितने शव बरामद होंगे उनको परिजनों को सौंप दिया जाएगा और बाकी लापता लोगों को सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार मृत घोषित कर दिया जाएगा। डीजीपी ने बताया कि लोगों की ओर से लगातार एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं। जोशीमठ थाने में अब तक 35 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। ऐसे में कानूनन जो भी मदद देने का प्रावधान है उसके हिसाब से पुलिस काम कर रही है। सभी पीड़ितों के डीएनए सैंपल भी लिए जा रहे हैं। ताकि, शवों और मानव अंग के डीएनए से उनका मिलान कराया जा सके।