केंद्र की मोदी सरकार की रणनीति सिर्फ ढाई से तीन लोग ही समझ पाते हैं और बदकिस्मती से उनमें उत्तराखंड का एक भी नाम नही है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का इस्तीफा राज्य में टूट रहे वोट बैंक को फिर से पाने का एक सुनहरा मौका है तो फिर भला ऐसा मौका बीजेपी क्यों छोड़े। राज्य के बारे में अगर सच में कोई राज्य का नेता फिक्रमंद होता तो मंत्रिमंडल पहले भी इस्तीफे की माँग को लेकर केंद्र में जा सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नही। लेकिन अब 2022 के लिए जनता का बदलता मिजाज देखकर और राज्य में आम आदमी पार्टी की मौजूदगी से भाजपा में अंदरखाने बहुत बेचैनी है। राज्य में आम आदमी पार्टी के आने से बड़ी संख्या में जहां कांग्रेस का वोट बैंक प्रभावित है वहीं भाजपा के पूर्व पदाधिकारी भी एक एक कर आम आदमी पार्टी से जुड़ते गए। वजह ? लोगों की कांग्रेस के प्रति नफरत और भाजपा की कुशासन व्यवस्था।

ऐसे में बीजेपी के लिए अपने वोटर को बांधे रखना बेहद जरूरी है। आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव से केंद्र में बैठे दो लोगों की राजनीतिक गणित में भी हलचल मची हुई है। निकाय चुनाव में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश, हिमांचल और गुजरात में जीत हासिल की उसके भय से उत्तराखंड में परिवर्तन किया जाना लाजमी है। उत्तराखंड की जनता को पिछले चार सालों में क्या मिला क्या नही, इससे कोई फर्क नही पड़ता लेकिन "भाईयों और बैंणों" के सम्बोधन के साथ अगर ये जोड़ दिया जाय कि हमारी सरकार ने काम न करने वालों के खिलाफ हमेशा एक्शन लिया है तो वोट का कुछ प्रतिशत तो बढ़ना तय है।

यही वजह है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से इशारों में कुछ कार्य ऐसे करवाये गये जिससे उनको हटाने के बाद लोगों की सहानुभूति बटोरी जा सके। वरना सोचिए जो आदमी तोते की तरह हर कार्य को करने से पहले और कुछ शब्द बोलने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी से शुरुआत करता हो, वह गैरसैंण को मण्डल बनाने की घोषणा करे वह भी बिना मोदी और मंत्रिमंडल से चर्चा के, सरासर राजनीतिक चाल लगती है। आपको याद दिलवा दें कि जब परेड ग्राउंड में निर्दोष छात्रों पर लठ मारे गये तब कुछ नही बोले मंत्री, रोजगार नही दे पाए रावत तो भी कुछ नही बोले मंत्री, सड़क की मांग में बैठी महिलाओं पर चलाई लाठी तो भी कुछ नही बोले मंत्री । लेकिन गैरसैंण को मण्डल बनाते ही मंत्री सीधा दिल्ली दौड़ गये, समझ से थोड़ा हटकर लेकिन यही सच है। स्क्रिप्ट पहले से ही लिखी गई थी और कुछ मंत्रियों को रोल के लिए तैयार किया गया था जिनको उत्तराखंड से दिल्ली तक जाना था।