उत्तराखंड राज्य जिसका की अधिकांश भूभाग पहाड़ी है में कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। एक तरफ बात ऑक्सिजन की कमी को दूर करने की हो रही तो दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्रो में हस्पतालों की इतनी कमी है कि अगर कोरोना प्रभावी हुआ तो बेड मिलना तो दूर की बात समय पर चिकित्सीय वाहन मिलना भी मुश्किल है। कोरोना के बढ़़ते मामलों को देखते हुए गुरुवार को बुलाई गई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित कर दी गई थी। फिर तय किया गया कि मंत्री परिषद की अनौपचारिक बैठक कर कोरोना संकमण की स्थिति पर विमर्श कर लिया जाए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों के साथ कोरोना संक्रमण से निबटने के उपायों पर विमर्श किया। इसमें चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि हालात पर नियंत्रण के राज्य में कम से कम 10 दिन कोरोना कफ्र्यू लगाया जाना चाहिए। शाम को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में हुई मंत्री परिषद की अनौपचारिक बैठक में राज्य में कोरोना की स्थिति पर गहन मंथन किया गया। सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार तय हुआ कि फिलहाल सरकार लाकडाउन नहीं करेगी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य में भीड़भाड़ न होने पाए। इस कड़ी में सार्वजनिक कार्यक्रमों (सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक) के आयोजन पर परिस्थितियां सामान्य होने तक रोक लगाने पर सहमति बनी है।

एक तरफ सरकार कुम्भ चला रही है तो दूसरी तरफ भीड़ न होने की बात कह रही है, खैर राजनीति की दिशा और दशा दोनों ही अगल अलग होती हैं इसलिए कुछ भी कहना ठीक नही है। लोगों को अपनी जिम्मेदारी खुद लेनी होगी और खासकर पहाड़ी क्षेत्र के नागरिकों को जब कि हस्पताल, सड़क और यातायात की भारी किल्लत है। खैर इस बीच एक और बड़ाफैसला सरकार द्वारा लिया गया है जो कि शादी विवाह को लेकर है। अभी तक विवाह कार्य में 100 लोगों के सम्मिलित होने की अनुमति थी लेकिन अब इसमें फेर बदल किया जा रहा है। अब वैवाहिक कार्य में केवल 50 लोगों के सम्मिलित होने की अनुमति है जिसमे 25-25 दोनों पक्षों से लोग सम्मिलित हो सकेंगे।