वर्ष 2017 से चीन और भारत के रिश्ते काफी नाजुक स्थिति में चल रहें हैं। एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री हैं जो बेतथ्य बातें करने में माहिर हैं तो दूसरी तरफ सीजीम्पिंग हैं जिसको भारत गिड़गिड़ाता हुआ अच्छा लगता है और इसको वह अवसर समझ तमाम चीनी माल की खपत भारत में करता है। आज सभी देश ये समझ गये हैं कि मोदी सरकार के बसके भारत की जनता कि सुरक्षा करना नही है, इसलिए पाकिस्तान जैसे देश भी भारत को ऑक्सिजन और विण्टेलेटर देने की बात कर रहा है। इस बात में ताजुब होना भी नही चाहिए क्योंकि जो प्रधानमंत्री अपनी एक चुनावी रैली में 130 करोड़ रुपया और एक बार की मन की बात करने में कई करोड़ रुपये खर्च करता है सिर्फ इसलिए की उसकी छवि साफ दिखे, उसके पास भारत के युवा वर्ग के लिए कोरोना वैक्सीन लगाने के पैसे नही हैं। मझेदार बात यह कि कोरोना निर्माता कम्पनी महज 150 रुपये की एक मात्रा (डोज) सरकार को दे रही है। इस हिसाब से एक व्यक्ति पर सरकार को 300 रुपया खर्च करने हैं और भारत में लगभग 60 से 65% आवादी 18 वर्ष से 44 वर्ष के बीच आती है। ऐसे में देखा जाय तो केंद्र सरकार को रैलियों जितना भी खर्च करने की जरूरत नही है। जिस तरह से मोदी सरकार ने दवा की कीमतों को बढ़ाकर इसको राज्यों को देने का काम किया है उससे दो बातें साफ हैं। एक मोदी सरकार के लिए युवा लोग सिर्फ चुनावी भीड़ का जरिया हैं और इससे ज्यादा कुछ नही, क्योंकि जो आदमी 400 प्रति व्यक्ति देकर बिहार से लोगों को बंगाल बुला सकता है चुनावी रैली में क्या वह 300 प्रति व्यक्ति खर्च नही कर सकता ? दूसरा इसमें राजनीति भी साफ नजर आती है, यह दवा की जो दो कीमतें हैं इसने गैर बीजेपी शासित प्रदेशों को दवा न मिले ऐसे प्रयास किए जा रहें है जिससे लोगों को लगे की भाजपा शासित प्रदेश ही अच्छे हैं। इस बात को भी नकारा नही जा सकता है कि भाजपा शासित प्रदेशों को दवाई केंद्र से ही भेजी जाएं और वह 150 रुपये प्रति डोज के हिसाब से ही दी जाए जबकि गैर बीजेपी शासित प्रदेशों को इसकी मोटी कीमत चुकानी होगी जबकि पहले से ही केंद्र पर फंड के भेदभाव के आरोप भी लग रहे हैं।

अब समझने वाली बात तो ये है कि अपने आप को सर्वशक्तिमान समझने वाले मोदी आखिर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से मदद क्यों ले रहें हैं ? दरअसल भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए विदेशी मीडिया लगातार मोदी और उनकी सरकार को लेकर अलग अलग लेख प्रकाशित कर रहा है। द ऑस्ट्रेलिया ने तो मोदी सरकार को अहंकारी तक कह दिया जिसके बाद मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को झटका लगा है। मैक इन इंडिया का नारा देने वाले मोदी समय पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऑक्सिजन ही नही पहुंचा पा रहें हैं, पिछले छ सालों में उन्होंने इतना त्वरित विकास देश में किया है। लिहाज अब देश को अधिक ऑक्सिजन और ऑक्सिजन बेड की जरूरत आ पड़ी है और मोदी जी कौशल विकास प्रोगाम के बाद भी भारत इतनी तरक्की नही कर पाया कि रातों रात ऑक्सिजन बेड बनाए जा सकें। इसलिए बची हुई इज्जत का भाजी पाला न हो जाए तो मोदी जी ने 16 सालों से बन्द पड़ी पॉलिसी में फेरबदल किया और चीन को भारत से 25000 ऑक्सिजन बेड का आर्डर भेजा गया। अब केंद्र सरकार के कुछ नेता अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए निपा पोती कर कई कहानियां बना कर अपने अंध वोटरों को समझाने में जुट गये हैं जिससे उनकी भीड़ पर असर न पड़े।

चंद रोज पहले पंजाब से खबर आई थी कि पंजाब सरकार पाकिस्तान से ऑक्सिजन और बेड की मदद लेना चाहती है, उस समय केंद्र सरकार ने ऐसा करने की मंजूरी पंजाब सरकार को नही दी क्योंकि वहां इंसान नही बल्कि कांग्रेसी रहते हैं। शायद लोगों का कांग्रेस को वोट देना मोदी जी को पसन्द नही इसलिए कांग्रेस शासित प्रदेशों का हवा पानी मोदी जी बन्द करना चाहते हैं लेकिन कर नही पा रहे क्योंकि वो दिल्ली से होकर नही जा रहा है। बैरहाल गैर बीजेपी प्रदेशों का कहना है कि उनके पास इतना पैसा नही है कि वो वैक्सीन खरीद लें और बात सिर्फ वैक्सीन खरीदने की नही है, वैक्सीन लगाने तक व्यवस्थाओं पर होने वाली व्यय के लिए गैर भाजपा सरकारें तैयार नही हैं। अब आप समझ सकतें हैं जहां प्रजा और प्रजा में फर्क हो उस राजा का शासन कैसा होगा। खैर, मोदी जी के बसके अगर युवाओं को वैक्सीन लगाना नही है तो विदेशों के आगे हाथ फैला लें क्योंकि जो विण्टेलेटर, ऑक्सिजन दें सकतें हैं वही देश वैक्सीन भी दे देंगे इतनी देश के युवाओं को उम्मीद हैं क्योंकि इन्ही में से लाखों युवाओं के परिजन विभिन्न देशों में रहतें हैं और उन देशों को नागरिक टैक्स की कदर अच्छे से आती है।