देश में ऑक्सिजन का भारी संकट है ऐसे में केंद्र सरकार राज्य को ऑक्सिजन देने में विफल साबित हो रही है। आरोप है कि केंद्र सरकार गैर भाजपाई राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है और ऑक्सिजन नही दिया जा रहा है। क्या वर्तमान केंद्र सरकार को लोगों की कोई चिंता नही है ? कल हुई मुख्यमंत्रियों और प्रधनमंत्री की बात से तो यही लगता है। देश की राजधानी दिल्ली ऑक्सिजन की मार झेल रही है सिर्फ इसलिए नही कि वहाँ व्यवस्थाएं खराब थी बल्कि इसलिए की व्यवस्थाओं को खराब करने को कोशिश की जा रही है। कल हुई बैठक में सीएम केजरीवाल ने जिस तरह से प्रधानमंत्री के आगे सवाल रखे और उसका वीडियो सार्वजनिक किया उससे केंद्र सरकार की नियत और उन प्रदेशो की नियत जहां भाजपा की सरकार है, पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में ऑक्सिजन को दो राज्यो उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लाया जा रहा है लेकिन पहले उत्तर प्रदेश ऑक्सिजन के ट्रक को रोक देता है और उसके बाद हरियाणा में दिल्ली से ऑक्सिजन लेने गये ट्रक को ऑक्सिजन प्लांट में घुसने ही नही दिया जाता है। मतलब साफ है भाजपा शासित प्रदेश किसी के इशारों पर काम कर रहें है और दिल्ली में केजरीवाल सरकार को बदनाम करना चाहते हैं। ये बात सीएम केजरीवाल भली प्रकार से समझ गये थे इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ हुई पूरी वार्ता जनता के साथ ऑनलाइन सांझा कर दी, और यही सही भी है। आखिर जनता को भी तो पता चलना चाहिए कि उनके साथ धोखा कौन कर रहा है। लेकिन जैसे ही चोरी पकड़ी गई तो प्रोटोकॉल का हवाल देकर सीएम केजरीवाल के ऊपर राजनीतिक दबाव बनाया जाता है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़ी ।

देश का मीडिया कितना बिक गया है और पत्रकारिता में कितने नीच और लाचार लोग आ गये हैं जिन्होंने एक बार भी यह सवाल नही उठाया कि इसमें गलत क्या था। भारत एक है और अगर दिल्ली में ऑक्सिजन प्लांट नही हॉ तो क्या दिल्ली को ऑक्सिजन नही दिया जाना चाहिए ? लेकिन बिके हुए दलाल पत्रकार उल्टा उसी सरकार को चोर बात रहें है जिसको गैस देने के वाद कर केंद्र सरकार ने आधी गैस पहुंचाई। कैसे बचेंगे लोग ? ये सवाल केंद्र की जगह जब दिल्ली सरकार से पूछा जाएगा और दिल्ली सरकार कहेगी की ऑक्सिजन नही तो यही बिके हुए लोग भरोसा नही करेंगे क्योंकि इनके आका ने जो कह दिया वही सच है। ऐसे में अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री में वार्ता को ऑनलाइन लोगों के साथ सांझा किया तो क्या गलत किया । जनता ने जिस सरकार को चुना है उसमें विश्वास बनाये रखना उस सरकार की जवाबदेही है। जनता को पता चलना चाहिए की चोर कहाँ कहाँ बैठे और ईमानदार कौन बाकी बचा हुआ है।

जिस नाव का मांझी विपरीत परिस्थितियों में नाव को डूबो दे उसमें सवार लोगों को तैरना आना जरूरी है, नही तो मौत सुनिश्चित है। मौजूदा वक्त में मांझी (मोदी) देश रूपी नाव को नही सम्भाल पाया और एक समझदार तैर रहा है तो उसको डुबाने की कोशिश में पूरा मांझी मंत्रालय लगा हुआ है, कमाल की बात है। मुख्य मीडिया के कुछ लोग जानते हैं कि टीवी पर अब सच दिखाना मुमकिन नही है, क्योंकि दिखाया तो उनको केंद्र से नोटिश भेज दिया जाएगा। इसलिए कुछ टीवी चैनलों ने अपने यूट्यूब चैनल खोले जिनपर वो सच्चाई दिखाते हैं। उदाहरण के लिए आज तक वालो का यूट्यूब चैनल "दी ललनटॉप" एक मात्र यूट्यूब चैनल जिसने मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हकीकत खुल के दिखाई। लेकिन मुख्य मीडिया में वाराणसी पर कोई कवरेज नही है क्योंकि दिखाई तो आका नाराज हो जाएंगे।