उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर जो तस्वीरें निकलकर आ रही हैं, दिल झगजोर देने वाली हैं। यूपी सीएम का कहना है कि उत्तर में ऑक्सिजन और दवा के साथ हस्पतालों की कोई कमी नही है जबकि सच इसके ठीक उलट है। आपको शिक्षक संघ द्वारा जारी एक आंकड़ा का हवाला देते हुए हम ये खबर प्रकाशित कर रहें है। शिक्षक संघ यूपी का कहना है कि पंचायत चुनाव के चलते अब तक यूपी में 135 से अधिक बेसिक शिक्षकों की मौतें हो चुकी है। वहीं पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा की माने तो अब तक पंचायत चुनाव में कुल 705 सरकारी कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है लेकिन सीएम योगी के कानों में जूं तक नही रेंग रही है। वही यू ट्यूब पर 18 मिलियन सब्सक्राइबर पूरे कर चुके प्रसिद्ध चैनल "the lallantop" की माने तो यूपी की स्थिति बेहद खराब है। सरकारें आंकड़े छुपा रही हैं और सच तो ये है कि यूपी सरकार को भी कोरोना से हुई मौतों की सही जानकारी नही है। तो क्या योगी भी मोदी की तरह अपनी छवि साफ करने का काम कर रहें हैं। आखिर चुनाव आयोग किसके इशारों पर काम कर रहें हैं ? और अगर चुनाव आयोग मुक्त रूप से कार्य नही कर पा रहे या जान कर भी लोगों को मौत के मुह में धकेल रहें है तो चुनाव आयोग के सभी कर्मचारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।

दरअसल, प्रोपर्टी तो चुनाव आयोग के सदस्यों की जब्त होनी चाहिए थी लेकिन वहाँ या तो यूपी सीएम योगी की पहुंच नही या फिर उन्ही के इशारों पर काम हो रहा है और प्रोपर्टी जब्त हो गरीब लोगों की ? यूपी सीएम को अपने नाम के आगे से योगी शब्द हटा लेना चाहिए क्योंकि इस्तीफा तो वो देंगे नही क्योंकि भाजपा के लोगों को सत्ता से कितना लगाव है ये देश ही नही बल्कि विदेशों के लोग भी जान गये हैं। एक विदेशी खिलाड़ी आईपीएल छोड़कर ये कहकर चला जाता है कि अपने नागरिकों के इलाज के लिए पैसे नही और आईपीएल में करोड़ो रुपए लुटाने के लिए हैं। चाहता तो वो भी खेल के करोड़ो ले जा सकता था लेकिन जिसमें इंसानियत जिंदा होती है वही इतना दम दिखाता है। ये राजनीतिक दल क्या समझेंगे और खासकर भाजपा वाले, जिनको लोगों की जान से ज्यादा चुनावी आंकड़े पसन्द हैं।

हजारों लाशों पर अगर यूपी फिल्मसिटी बना भी लेगा तो क्या ? हस्पतालों में मची ये चीख पुकार कैसे भुलाओगे, ये लोग कैसे भूलेंगे कि जिनको हस्पतालों में ऑक्सिजन, दवाई, बेड और डॉक्टर नही मिले ? आपको सिर्फ वही नीच याद रखेंगे जिन्होंने मुश्किल की इस घड़ी में खूब कालाबाजीरी की और पैसों की लूट मचाई। यूपी का शिक्षक आज कल जिस खौफ में जी रहा वह अपने आप में किसी आतंक से कम नही। शिक्षक नाम की गोपनीयता और बिना चेहरा दिखाए अपनी बात मीडिया को बता रहें हैं और डर रहें कि कहीं उनकी ड्यूटी 2 मई को लगाकर मौत के मुह में न धकेल दे। अगर इनकार करते हैं तो नौकरी जाने का डर और जाते हैं तो कोरोना का डर। इतना कुछ होने के बाद भी सीएम कह रहें है स्थिति सामान्य है तो इसको जंगल राज ही कहेंगे।